जागरण संवाददाता, आजमगढ़। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की 500 महिलाओं को स्वरोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसकी तैयारी विकास खंड स्तर पर पूरी हो चुकी है। समूह की महिलाओं का चयन भी अंतिम दौर में है।
महिलाओं को ठेला दिया जाएगा और रोजगार करने के लिए उनकी रूचि के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित भी कराया जाएगा। समूह की महिलाओं को बैंक से लोन भी दिलाया जाएगा,जिससे वह अपना रोजगार शुरू कर सकें।
समूह से जुड़ी महिलाओं को स्वयं का कारोबार करने के लिए डिजाइन किया गया ठेला उपलब्ध कराया जाएगा। जिसके लिए धनराशि समूह के फंड से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे समूह का पैसा समूह में ही रहेगा।
महिलाओं के चयन के लिए ब्लाकवार बीएमएम(ब्लाक मिशन मैनेजर) के माध्यम से बैठक कराई जाएगी। जिसमें इच्छुक महिलाओं का चयन कर सूची बनाई जाएगी।
योजना के क्रियान्वयन से पहले कार्यशाला का आयोजनन किया जाएगा। जिसमें चयनित महिलाओं को उनकी रुचि के कारोबार के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे वे हर सीजन के अनुसार फल-सब्जी, चाट, पकौड़ी-चाय, अंडा, फलों का जूस आदि की बिक्री कर सकेंगी।
ठेले से कारोबार करने पर महिलाओं को सुरक्षा की चिंता नहीं रहेंगी। संबंधित ब्लाक के समीप विकसित बाजार में सुबह में ठेला लगाएंगी और शाम को लेकर अपने घर चली जाएंगी। इस कारोबार से एक महिला प्रतिदिन एक से डेढ़ हजार रुपये के सामान की बिक्री कर एक माह मेें एक लाख रुपये से अधिक का कारोबार कर सकती हैं।
वर्मी कंपोस्ट बनाकर भी आत्मनिर्भर बनेंगे महिलाएं
‘‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्मा कंपोस्ट खाद बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। गोशालाओं से उन्हें गोबर सस्ते दर पर मिल जाएगा। वर्मा कंपोस्ट बनाने के लिए केचुए की व्यवस्था केवीके के कृषि विज्ञानियों से संपर्क कर सुनिश्चित कराई जाएगी। तैयार वर्मी कंपोस्ट विभिन्न ताैल में पेैक कराई जाएगी। जिसे उद्यान विभाग और वन विभाग की पौधशाला में बिक्री के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा निजी नर्सरी और घर पर शाक-भाजी की खेती व फूल-पौधों के लिए भी लोग खरीद सकेंगे।
-परीक्षित खटाना, सीडीओ। |
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