आर्टिफिशियिल इंटेलिजेंस (एआई) का असर न सिर्फ आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है बल्कि दूसरे सेक्टर में भी इसके चलते बदलाव दिख सकता है। सबसे ज्यादा डर नौकरियों पर इसके असर को लेकर है। माना जा रहा है कि ऑफिस में बैठकर किए जाने वाले कई काम अब एआई टूल्स की मदद से पूरे होंगे। इन कामों के लिए इनसान की जरूरत नहीं पड़ेगी। मनीकंट्रोल ने इस बारे में जानने के लिए इंफोसिस के को-फाउंडर नआर नारायणमूर्ति से बातचीत की। उनसे एआई के असर के बारे में पूछा।
एआई के इस्तेमाल से अच्छी क्वालिटी और प्रोडक्टिविटी मिलेगी
नारायणमूर्ति ने कहा, “प्रोडक्टिविटी के लिए जेनरेटिव एआई के इस्तेमाल का मेरा अनुभव यह बताता है कि इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से स्मार्ट माइंड को अच्छी क्वालिटी और प्रोडक्टिविटी मिलेगी। इसलिए युवाओं को इससे चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्हें सिर्फ इस टेक्नोलॉजी को जानने और सीखने की जरूरत है। वे कामकाज में मदद के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। वे अपने फायदे के लिए इस टेक्नोलॉजी को जल्द सीखकर नए आइडियाज और डिसिप्लिन जल्द लर्न कर सकते हैं। इसका मतलब है कि स्मार्ट और मेहनती लोगों के लिए दुनिया खत्म होने नहीं जा रही। “
इंफोसिस के को-फाउंडर पहले भी एआई के बारे में अपनी राय बता चुके हैं। उन्हें बदलाव में टेक्नोलॉजी की भूमिका का बड़ा अनुभव है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि चीजें बदलती रहती हैं। इस बदलाव के बीच एक चीज जो ठहरती है वह नई चीजों को सीखने की कपैसिटी। उनका मानना है कि हर प्रोफेशनल की सफलता में सीखने की कपैसिटी का बड़ा हाथ है।
एआई में जल्द और ज्यादा काम करने की क्षमता
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एआई कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव ला रहा है। काम करने की इसकी स्पीड बहुत तेज है। जो काम इनसान को करने में कई दिन लगते हैं, उसे एआई कुछ ही मिनट में पूरा कर देता है। इस वजह से इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। एआई स्किल वाले लोगों की ज्यादा डिमांड है। हाल में दिल्ली में हुई एआई इम्पैक्ट समिट में भी एक्सपर्ट्स ने एआई के सही इस्तेमाल पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एआई पर सबका हक होना चाहिए।