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मणिकर्णिका घाट पर अभियान से शहर में काफी हलचल मच गई है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर शनिवार को बुलडोजर से जलासेन घाट से लेकर सिंधिया घाट तक सफाई की गई। इस दौरान कई छोटे मंदिर भी ध्वस्त कर दिए गए। भारी मशीनों से मणिकर्णिका घाट पर कॉरिडोर बनाने के लिए कार्रवाई शुरू हुई। मशीनों के भारी शोर ने स्थानीय निवासियों का ध्यान आकर्षित किया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र को विकसित करने के क्रम में यह कार्रवाई की जा रही है।
वाराणसी के दालमंडी के बाद अब बाबा विश्वनाथ की नगरी के सबसे पवित्र मणिकर्णिका घाट पर प्रशासन का बुलडोजर चलना शुरू हो गया है। मणिकर्णिका घाट से सिंधिया घाट तक प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण को लेकर चल रही इस कार्रवाई ने शहर में हलचल रही। काशी की संकरी गलियों और ऐतिहासिक घाटों की सूरत बदलने की कवायद अब अपने अगले चरण में पहुंच गई है।
दालमंडी में अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद, प्रशासन का पूरा जोर अब मोक्षदायिनी मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प पर है। मणिकर्णिका तीर्थ को एक भव्य कॉरिडोर के रूप में विकसित करने के लिए भारी मशीनों के जरिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
प्रशासन की योजना मणिकर्णिका घाट से लेकर सिंधिया घाट तक के क्षेत्र को सुव्यवस्थित और चौड़ा करने की है। इसके तहत घाटों पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं, शवदाह के लिए आने वाले लोगों के लिए सुगम मार्ग और बैठने की व्यवस्था, और सिंधिया घाट तक कनेक्टिविटी को और अधिक सुदृढ़ करना शामिल है।
जहाँ एक ओर प्रशासन इसे विकास का नाम दे रहा है, वहीं स्थानीय काशीवासी और तीर्थ पुरोहित इस योजना पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मणिकर्णिका घाट के आसपास स्थित प्राचीन छोटे मंदिरों और विग्रहों को बुलडोजर की कार्रवाई से नुकसान पहुँच रहा है। काशीवासियों ने इस कॉरिडोर प्रोजेक्ट को \“व्यर्थ\“ करार दिया है। उनका तर्क है कि काशी की प्राचीनता उसकी संकरी गलियों और पुराने ढांचों में ही बसी है, जिसे आधुनिकता के नाम पर नष्ट किया जा रहा है।
मणिकर्णिका तीर्थ पर शनिवार को कार्रवाई जारी रहने से खूब हलचल नजर आई। भारी मशीनों की गड़गड़ाहट और सुरक्षा बलों की तैनाती ने क्षेत्र में एक नई हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय निवासियों में इस कार्रवाई को लेकर चिंता और विरोध की भावना बढ़ती जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जबकि स्थानीय लोग इसे उनकी आस्था और विरासत के लिए खतरा मानते हैं।मणिकर्णिका घाट पर चल रही इस कार्रवाई ने न केवल प्रशासनिक हलचल को जन्म दिया है, बल्कि स्थानीय समुदाय में भी एक नई बहस को जन्म दिया है। |
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