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मृत्यु के बाद भी नहीं मिल रही दो गज जमीन, अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहा सूर्यपुरा मुक्तिधाम

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अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहा सूर्यपुरा मुक्तिधाम



संवाद सूत्र, सूर्यपुरा। प्रखंड क्षेत्र में सदियों से नदियों के किनारे होते आ रहे दाह संस्कार की परंपरा आज गंभीर संकट से गुजर रही है। सूर्यपूरा पंचायत में मुक्तिधाम की भूमि पर लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है। हालात यह है कि जो श्मशान भूमि पहले से मौजूद थी, उसे भी आसपास के भूमि धारकों द्वारा नहीं बख्शा जा रहा है।  

इसके कारण आम जनों को शव के अंतिम संस्कार में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अतिक्रमण करने वाले लोग शव जलाने के लिए दो गज जमीन तक छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर अंतिम संस्कार कैसे किया जाए।  
श्मशान घाट को अतिक्रमण से मुक्त कराने की गुहार

इस समस्या को लेकर सूर्यपुरा के ग्रामीणों ने पूर्व में कई बार जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी बिक्रमगंज, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी सूर्यपुरा को लिखित आवेदन देकर श्मशान घाट को अतिक्रमण से मुक्त कराने की गुहार लगा चुके है, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।

अतिक्रमण के कारण गरीब मजदूर, किसान एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपने ही गांव में अंतिम संस्कार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में कई बार सड़क किनारे या नदी-नहर के तट पर शवदाह करना पड़ता है, जहां पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।  
मृत्यु के बाद शव को जलाने के लिए संघर्ष

वहीं, सक्षम और संपन्न परिवार अंतिम संस्कार के लिए बक्सर गंगा स्थित श्मशान घाट चले जाते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मृत्यु के बाद भी अपने परिजन के शव को जलाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।  

वहीं सूर्यपुरा-भलुनी-भवानी मुख्य पथ के पश्चिमी छोर पर स्थित एकमात्र मुक्तिधाम पर अतिक्रमण से स्थिति और गंभीर हो गई है। श्मशान भूमि पर कहीं पशु बांधे गए हैं, कहीं मड़ई और ईंट रखी गई है, तो कहीं खेत में जमीन मिलाकर कब्जा कर लिया गया है।  

ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने पर अतिक्रमणकारी मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर मुक्तिधाम को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की है।नबकी बारून टाड़ के तरफ काव नदी पास भी जाने का रास्ता नहीं है।
क्या कहते हैं ग्रामीण

अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि मुक्तिधाम आस्था से जुड़ा स्थल है। इस पर अतिक्रमण दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर स्थायी घेराबंदी की मांग की।

ग्रामीण सरोज कुमार खरवार ने कहा की घर-परिवार में सुनते आ रहे हैं कि पहले गांव के बाहर नदी के पास ही दाह संस्कार होता था, लेकिन अब वही जगह संकीर्ण होती जा रही है और आसपास के लोग कब्जा करते जा रहे हैं। जिसके कारण शव को सड़क के किनारे दाह संस्कार करना पड़ता है

मुकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि गांव के नजदीक मुक्तिधाम नहीं रहने से अंतिम संस्कार में काफी परेशानी होती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

ग्रामीण विनोद सिंह, बारून टाड़ निवासी ने बताया कि काव नदी के किनारे दाह संस्कार किया जाता है, लेकिन वहां जाने का रास्ता तक नहीं है और भूमि कटाव से जगह लगातार घट रही है।
पंचायत में मुक्तिधाम निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया

इस संबंध में सूर्यपुरा पंचायत मुखिया प्रमोद कुमार ने बताया कि पंचायत में मुक्तिधाम निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसमें एक प्रस्ताव दिया गया है, जो की सूर्यपूरा गढ़ के पश्चिम तरफ ठोरा नदी के पास शवदाह गृह एवं नदी में घाट निर्माण की योजना है, मापी के बाद जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा।

अंचलाधिकारी गोल्डी कुमारी ने बताया कि मुक्तिधाम का निर्माण पंचायत स्तर पर मुखिया द्वारा कराया जाता है और सूर्यपुरा पंचायत से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
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