जागरण संवाददाता, चित्रकूट। कोषागार विभाग में वर्ष 2018 से 2025 के बीच 93 पेंशनरों के खातों में फर्जी भुगतान आदेशों के जरिए करीब 43.13 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इस मामले में चार कर्मचारियों सहित कुल 97 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है, जिनमें से 33 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं।
एसआईटी की जांच में अब तक 21 बिचौलियों और दलालों को चिह्नित किया गया है, जिन्होंने पेंशनरों को अपने जाल में फंसा कर कोषागार से अनियमित भुगतान कराया। इनमें से सात को जेल भेजा चुका है।
एसआईटी ने जांच के दौरान लगभग ढाई सौ बैंक खातों की जांच कर गबन की गई धनराशि के लेन-देन के साक्ष्य जुटाए। ये लेन-देन स्थानीय स्तर के अलावा प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर और बांदा जिलों तक फैले पाए गए। चिह्नित दलालों में सात लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि 14 अब भी फरार हैं।
एसआईटी उनके लोकेशन ट्रेस कर पकड़ने में जुटी है। जांच में पता चला कि कई पेंशनरों ने दलालों के माध्यम से अपने खातों में फर्जी भुगतान का हिस्सा आनलाइन ट्रांजेक्शन और चेक के जरिए दिया। एसआईटी ने लेन-देन की कड़ियों का मिलान कर मजबूत साक्ष्य जुटाए।
वहीं, मृत पेंशनरों के नाम पर चार खाते फिर से खोले गए थे, और एक खाता राजेंद्र कुमार नामक व्यक्ति के नाम पर संचालित हुआ, जिसका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला।
एसआईटी ने दो मृत पेंशनरों के परिजनों से पूछताछ कर अनियमित भुगतान में भूमिका निभाने वाले दलालों और उनके हिस्से की जानकारी जुटाई। अब तक 3.98 करोड़ रुपये की रिकवरी भी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी फर्जी भुगतान और बिचौलियों का नेटवर्क उजागर कर और राशि की वसूली की जाएगी।
एसआईटी का फोकस अब भी फरार बिचौलियों और दलालों को पकड़ने, उनके खातों का मिलान करने और सभी साक्ष्यों को कोर्ट में मजबूत तरीके से पेश करने पर है। इस घोटाले में बैंकिंग प्रणाली की खामियों का भी खुलासा हुआ है, जिससे भविष्य में ऐसे अनियमित भुगतान रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
बता दें कि 17 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने पटल सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव, अशोक कुमार, सहायक कोषाधिकारी विकास सचान, सेवानिवृत्त सहायक कोषाधिकारी अवधेश प्रताप सिंह और 93 खाताधारकों के खिलाफ कर्वी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। संदीप श्रीवास्तव की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। |