यमुना प्राधिकरण नोएडा एयरपोर्ट के नजदीक प्लॉट योजना ला रहा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। YEIDA Plot Scheme 2026 : करीब तीन माह से उत्तर प्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण के बीच फंसी प्लॉट योजना का पेंच आखिरकार सुलझ गया है। यीडा ने प्लॉट योजना को लेकर रेरा की शर्तों को स्वीकार कर लिया है। रेरा पंजीकरण के बाद इसी माह प्लॉट योजना लॉन्च होने की उम्मीद है।
नए वर्ष में 973 आवासीय प्लॉट की योजना का पंजीकरण कराने के लिए यमुना प्राधिकरण ने रेरा में आवेदन किया था, लेकिन आपत्ति के कारण यह योजना तीन माह से रेरा और यीडा के बीच फंसी हुई थी। रेरा ने मुख्यरूप से दो आपत्ति लगाई थीं। पहली आपत्ति प्लॉट की कीमत के एक मुश्त भुगतान व दूसरी आपत्ति लीज टू एग्रीमेंट को लेकर थी।
एक मुश्त भुगतान पर बनी थी सहमति
एक मुश्त भुगतान पर पहले ही सहमति बन चुकी थी, लेकिन लीज टू एग्रीमेंट को रेरा और यीडा में सहमति नहीं बन पा रही थी। रेरा बिल्डर परियोजना की तरह ही यीडा के आवंटित प्लॉट का लीज टू एग्रीमेंट की शर्त पर अड़ा था। वहीं यीडा का तर्क था कि प्लॉट पर कब्जा देते समय ही लीजडीड की जाती है। इससे आवंटियों और प्राधिकरण दोनों को ही सुविधा है।
बोर्ड ने रेरा की शर्त को स्वीकार करते हुए प्लॉट आवंटन के बाद लीज टू एग्रीमेंट लागू करने के निर्देश यीडा अधिकारियों को दिए। बोर्ड के निर्देश के बाद यीडा की ओर से रेरा की आपत्ति को निस्तारित कर दिया गया है। एसीईओ शैलेंद्र भाटिया का कहना है कि रेरा की सभी आपत्ति का निस्तारण हो गया है। प्लॉट योजना की पंजीकरण प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी। इसके बाद योजना को लांच कर दिया जाएगा।
सेक्टर- 15 सी में पहले बार आवंटित होंगे प्लॉट
योजना के तहत यीडा पहली बार सेक्टर 15 सी में प्लॉट योजना निकाल रहा है। इसके अतिरिक्त सेक्टर 18 व 24ए में भी प्लॉटों का आवंटन होगा। योजना में सामान्य श्रेणी में कुल 755 प्लॉट होंगे। योजना में शामिल प्लॉटों का आकार 162 वर्गमीटर से लेकर 290 वर्गमीटर तक है। सबसे अधिक 481 प्लॉट दो सौ वर्गमीटर श्रेणी व 476 प्लॉट 162 वर्गमीटर श्रेणी में हैं।
आवंटियों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
यीडा की शर्त के तहत आवेदन के समय प्लॉट की दस प्रतिशत राशि पंजीकरण शुल्क के तौर पर जमा होगी। प्लॉट आवंटित होने पर कुल कीमत की शेष 90 प्रतिशत राशि का भुगतान 60 दिन में करना होता है। एग्रीमेंट टू लीज का नियम लागू होने से आवंटी पर एक मुश्त भुगतान के साथ स्टांप शुल्क का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा।
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