कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गई
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से लगभग 144 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा है। अनुमान है कि फरवरी, 2022 से दुनियाभर में तेल की बिक्री से रूस की कुल कमाई लगभग एक ट्रिलियन यूरो रही है। बता दें कि भारत पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया के तेल पर निर्भर रहता रहा है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद रूस का तेल भारी छूट पर मिलने लगा, जिससे कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गई।
यूरोपियन थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के अनुसार, चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से चीन ने 210.3 अरब यूरो का रूसी तेल खरीदा है जबकि 42.7 अरब यूरो का कोयला और 40.6 अरब यूरो की गैस खरीदी है। युद्ध शुरू होने से लेकर तीन जनवरी, 2026 तक चीन की कुल खरीदारी 293.7 अरब यूरो थी।
सीआरईए ने कहा कि भारत ने रूस से 162.5 अरब यूरो का जीवाश्म ईंधन खरीदा है। इसमें 143.88 अरब यूरो का कच्चा तेल और 18.18 अरब यूरो का कोयला शामिल है। यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने रूसी जीवाश्म ईंधन खरीदने पर 218.1 अरब यूरो खर्च किए हैं। उसने तेल की खरीद पर 106.3 अरब यूरो, कोयले पर 3.5 अरब यूरो और गैस पर 108.2 अरब यूरो खर्च किए हैं।
तीन सप्ताह से किसी तरह का रूसी कच्चा तेल नहीं खरीदा: रिलायंस
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मंगलवार को कहा कि उसने लगभग तीन सप्ताह से किसी तरह का रूसी कच्चा तेल नहीं खरीदा है और जनवरी में भी किसी तरह के खरीदारी की उम्मीद नहीं है। दरअसल, रिलायंस का यह स्पष्टीकरण ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट के जवाब में आया है, जिसमें उसने डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के हवाले से कहा था कि कम से कम तीन टैंकर (इसमें लगभग 22 लाख बैरल यूराल) सिक्का पोर्ट की ओर जा रहे हैं।
इसी पोर्ट से जामनगर रिफाइनिंग कांप्लेक्स अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में बताए गए तीनों कार्गो शायद बीपीसीएल की बीना रिफाइनरी के लिए थे। इस रिपोर्ट का असर रिलायंस के शेयरों पर भी दिखाई दिया है और पिछले आठ महीनों के दौरान उसके शेयरों में एक दिन की सबसे बड़ी यानी चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का वैल्यूएशन 94,389 करोड़ रुपये कम हो गया। |