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भाई दूज पर शीतकाल के लिए बंद होंगे बाबा केदार के कपाट, केदारबाबा की पंचमुखी डोली को मंदिर में किया जाएगा विराजमान

LHC0088 2025-10-21 20:07:36 views 1204
  



संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ के कपाट भाई दूज पर्व यानी 23 अक्‍टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। बुधवार को विशेष पूजा अर्चना के बाद केदारबाबा की पंचमुखी डोली को मंदिर में विराजमान किया जाएगा। आगामी छह माह की पूजा अर्चना एवं भोले बाबा के दर्शन ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में होंगे। वहीं बद्री-केदार मंदिर समिति मंदिर के कपाट बंद करने को लेकर तैयारियों में जुट गई है। वहीं कपाट बंद होने से पूर्व मंदिर को 12 कुन्तल फूलों से सजाया गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गत शनिवार को केदारनाथ की पहाडी पर स्थित भैरवनाथ के कपाट बंद होने के बाद अब धाम के कपाट बंद करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बुधवार को बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति की उत्सव डोली में विराजमान किया जाएगा। इसके बाद 23 अक्टूबर यानी भैयादूज के अवसर पर परंपरा के अनुसार सुबह साढे चार बजे बाबा केदारनाथ को पूजा अर्चना, अभिषेक एवं अारती के साथ भोग लगाया जाएगा। जिसके बाद समाधि पूजा के उपरान्त भगवान छह महीने के लिए समाधि दी जाएगी।

ठीक साढे 8 बजे गर्भगृह के कपाट बंद किए जाएंगे। सभामंडप में स्थापित बाबा केदार की पंचमुखी डोली के सुबह 8:30 बजे मंदिर से बहार आने के बाद पौराणिक विधिविधान के साथ मंदिर के मुख्य कपाट के साथ ही पीछे के कपाट को बंद कर सील किया जाएगा। इसी दिन बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली रात्रि प्रवास के लिए अपने पहले पड़ाव रामपुर पहुंचेगी।

24 अक्टूबर को श्री केदारनाथ भगवान की चल-विग्रह डोली रामपुर से प्रातः प्रस्थान कर फाटा, नारायकोटी होते हुए रात्रि विश्राम के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। 25 अक्टूबर को चल-विग्रह डोली विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी से प्रस्थान कर अपने शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी। जहां पर शीतकाल में केदार बाबा की छह माह की नित्य पूजाएं संपन्न होंगी। मंदिर के कपाट बंद करने को लेकर बद्री-केदार मंदिर समिति तैयारियों में जुट गई है।

मंदिर समिति के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वाईएस पुष्पवाण ने बताया कि केदारनाथ के कपाट बंद करने को लेकर मंदिर समिति ने तैयारियां शुरू कर दी है। आगामी 23 अक्टूबर को ठीक 8.30 बजे के मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। जिसके बाद शीतकाल के छह माह तक आेंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भगवान की नित्य पूजाएं संपन्न होंगी। बताया कि मंदिर को 12 कुन्तल फूलों से सजाया गया है।
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