रागिनी बांये से तीसरे नंबर पर है बेबी दूसरे नंबर पर। (जागरण)
विद्या सागर, पटना। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार एक मार्मिक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने हजारों लोगों का दिल जीत लिया।
गणतंत्र दिवस की भव्य झांकी में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की पिंक बस की स्टीयरिंग मुसहर समाज की बेटी रागिनी कुमारी के हाथों में थी। यह सिर्फ एक झांकी नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर थी।
रागिनी कुमारी ने झांकी के दौरान न सिर्फ आत्मविश्वास के साथ बस चलाई, बल्कि पिछड़े और महादलित समाज की बेटियों को यह मजबूत संदेश दिया कि प्रशिक्षण, मेहनत और हौसले से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उनकी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि अवसर मिलने पर बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम वर्तमान में राज्य में 100 पिंक बसों का संचालन कर रहा है। फिलहाल इन बसों में पुरुष चालक तैनात हैं और महिलाएं सह-चालक की भूमिका में हैं। हालांकि निगम की योजना है कि आने वाले समय में सभी पिंक बसों पर महिला चालक और सह-चालक ही हों।
19 महिला ड्राइवरों को दी गई ट्रेनिंग
इसी दिशा में 19 महिला चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो एक महीने का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद राजधानी पटना में पिंक बसों की स्टीयरिंग संभालेंगी।
पटना जिले के नदवा की रहने वाली रागिनी कुमारी अपने परिवार की पहली स्नातक पास बेटी हैं। उनके पिता अजय कुमार मांझी टोला सेवक के रूप में कार्यरत हैं। रागिनी बताती हैं कि उनकी मां सोनी देवी और दादी यशोदा देवी ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया।
उन्होंने 18 अगस्त 2025 को आईडीटीआर, औरंगाबाद में वाहन चलाने के प्रशिक्षण के लिए नामांकन लिया। 16 सितंबर को प्रशिक्षण पूरा हुआ और 2 दिसंबर को पटना डीटीओ से उन्हें हेवी मोटर व्हीकल चलाने का लाइसेंस प्राप्त हुआ।
संगीत और योग में भी प्रशिक्षित हैं रागिनी
प्रशिक्षण के दौरान रागिनी को मोटर व्हीकल एक्ट, रोड सेफ्टी और तकनीकी पहलुओं की गहन जानकारी मिली। इससे पहले उन्हें लाइट मोटर व्हीकल का लाइसेंस भी प्राप्त हो चुका था। रागिनी संगीत और योग में भी प्रशिक्षित हैं और मानती हैं कि आत्मविश्वास ही आगे बढ़ने की सबसे बड़ी ताकत है।
गणतंत्र दिवस झांकी से पहले गांधी मैदान स्थित बस डिपो में रागिनी सहित छह महिला चालकों ने एक सप्ताह से अधिक समय तक अभ्यास किया।
इस दौरान उनके साथ चालक बेबी कुमारी भी मौजूद रहीं, जो पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के देहरी गांव की निवासी हैं और पुनपुन कॉलेज की छात्रा हैं। बेबी ने भी आईडीटीआर औरंगाबाद से प्रशिक्षण लेकर दिसंबर में हेवी मोटर व्हीकल लाइसेंस प्राप्त किया है।
गांधी मैदान में पिंक बस की यह झांकी सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि समाज की बेटियों के लिए उम्मीद, साहस और बदलाव का संदेश बनकर सामने आई। |
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