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हाइपरसोनिक मिसाइलें, फेज्ड बैटल और ऑपरेशन सिंदूर: 77वें गणतंत्र दिवस परेड पर दुनिया ने देखी भारत की ताकत

LHC0088 Yesterday 20:55 views 816
  

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी युद्ध कौशल झलकियों का परेड में वर्चस्व दिखा



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कर्तव्य पथ 77वें गणतंत्र दिवस परेड के मौके पर सोमवार को देश की प्रगति, संस्कृति और सामरिक ताकत की मनोहारी झलक से रूबरू हुई। जहां तीनों सेनाओं ने अपने-अपने अंदाज में सिंदूर फार्मेशन के जरिए ऑपरेशन सिंदूर के पराक्रम को जीवंत किया। गणतंत्र दिवस परेड़ की मुख्य थीम वैसे तो इस बार राष्ट्रगीत \“वंदे मातरम\“ के 150 वर्ष पर केंद्रित थी मगर निसंदेह तीनों सेनाओं की ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी युद्ध कौशल झलकियों का परेड में वर्चस्व दिखा।

सेना और नौसेना के जवानों ने अपने-अपने अंदाज में तो भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने फ्लाईपास्ट में एक खास सिंदूर फॉर्मेशन में उड़ान भरते हुए कर्तव्य पथ को गौरवशाली रोमांच का झण दिया। राष्ट्र की सामरिक ताकत के गौरवशाली पलों के बीच राज्यों की रंग-बिरंगी झाकियां कर्तव्य पथ पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और अनेकता में एकता का मनोहारी रंग बिखेर रहीं थीं।
21 तोपों को सलामी देने के साथ शुरुआत

सामरिक शक्ति और सांस्कृतिक वैभव के अनोखे संगम का आनंद कर्तव्य पथ पर मौजूद हजारों दर्शक ही नहीं गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि विदेशी मेहमान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन तथा यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी लेते नजर आए। गणतंत्र दिवस परेड की शुरूआत कर्तव्य पथ पर तिरंगा लहराए जाने और राष्ट्रध्वज को 21 तोपों को सलामी देने के साथ शुरू हुई।

  

राष्ट्रगान के साथ स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड तोपों ने यह सलामी दी। इसके उपरांत 100 सांस्कृतिक कलाकारों ने \“विविधता में एकता\“ थीम को प्रदर्शित करते हुए परेड की शुरूआत की। जबकि ध्वज फॉर्मेशन में सेना के चार एमआई-17 हेलीकाप्टरों ने कर्तव्य पथ पर फूलों की पंखुडि़यों की बारिश की। सैन्य परेड की शुरूआत परेड के कमांडर लेफ्टिनेंट दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सलामी देने के साथ शुरू हुई।
पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

इस पहले गणतंत्र दिवस समारोह की औपचारिक शुरूआत राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शहीद वीर सैनिकों की स्मृतियों पर श्रद्धांजलि देने से शुरू हुई। इसके उपरांत पीएम कर्तव्य पथ पर पहुंचे जहां रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तथा तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनकी आगवानी की। राष्ट्रपति मुर्म परेड के दोनों विदेशी मेहमानों उर्सुला तथा कोस्टा संग शाही बग्गी में कर्तव्य पथ पर पहुंची।

परेड कमांडर तथा परमीवर चक्र विजेताओं की सलामी के बाद तीनों सेनाओं और अ‌र्द्धसैनिक बलों की टुकडि़यों का मार्च पास्ट हुआ। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला गणतंत्र दिवस समारोह था और इसलिए पहली बार सेनाओं का सैन्य संसाधन कर्तव्य पथ पर एक वास्तविक युद्ध जैसी सीक्वेंस में दिखा। जिसकी शुरुआत टोही विमानों से हुई और फिर अन्य सैन्य इकाइयों जैसे लॉजिस्टिक्स और इन प्लेटफॉर्म के साथ चलने वाले जवान, युद्ध के गियर पहने मार्च पास्ट में नजर आए।
मिसाइल का हुआ प्रदर्शन

सेनाओं का एकीकृत संचालन केंद्र कांच के बॉक्स में दिखा जिसमें ब्रह्मोस और एस-400 जैसी मिसाइल हथियार प्रणालियों के उपयोग के साथ ऑपरेशन सिंदूर के संचालन को दर्शाया गया था। सेना का चरणबद्ध \“बैटल एरे फॉर्मेट\“ की भी पहली बार यहां झलक दिखाई गई जिसमें हवाई स्ट्राइक भी शामिल थे। टोही दल में सक्रिय युद्ध वर्दी में 61 कैवलरी शामिल रही तो एक हाई मोबिलिटी टोही गाड़ी आई।

  

हवाई सपोर्ट के लिए स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और उसका आ‌र्म्ड वर्जन, रुद्र, प्रहार फॉर्मेशन बनाते हुए युद्धक्षेत्र का आकार दिखा रहे थे। वहीं हमलावर टी-90 भीष्म टैंक और मेन बैटल टैंक अर्जुन ने भी अपने नजारे दिखाए तो सेना के हेलीकॉप्टर अपाचे और प्रचंड के हवाई समर्थन का परिदृश्य भी दिखाय गया।
आईएनस उदयगिरि की ताकत की झलक

इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल के साथ नाग मिसाइल सिस्टम का संगम भी इसका हिस्सा था। ऑपरेशन सिंदूर में सबसे मारक हथियार साबित हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और आकाश मिसाइल समेत प्रमुख हथियार प्रणालियों ने परेड के रोमांच को आधार दे दिया। नौसेना की झांकी \“एक मजबूत राष्ट्र के लिए एक मजबूत नौसेना\“ ने अपने जहाजों और पनडुब्बियों के साथ फ्रंटलाइन विमानवाहक पोत आइएनएस विक्रांत और आईएनस उदयगिरि की ताकत की झलक दिखाई।

वहीं भारतीय वायु सेना की टुकड़ी के मार्च पास्ट से तालमेल बिठाते हुए दो राफेल जेट, दो मिग-29, दो सुखोई-30 और एक जगुआर विमान ने \“स्पीयरहेड\“ फॉर्मेशन में एक रोमांचक फ्लाई-पास्ट किया जो \“\“सिंदूर फॉर्मेशन\“\“ का प्रतीक था। संस्कृति और सामिरक शक्ति के इन विहंगम दृश्यों ने उर्सूला तथा कोस्टा को भी लगातार रोमांचित किया और वे निरंतर कभी पीएम मोदी तो कभी तैनात अधिकारी से जानकारी लेकर अपनी उत्सुकता शांत करते नजर आए।
नितिन नवीन पहली पंक्ति में बैठे थे

विशिष्ट अतिथियों में तमाम केंद्रीय मंत्रियों के साथ भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहली पंक्ति में बैठे थे तो लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पिछली पंक्ति की सीट पर बैठे नजर आए। वंदे मातरम के साथ सांस्कृति विविधता तथा प्रगति को दर्शाने वाली 30 झांकियों जिनमें 17 राज्यों तथा 13 अलग-अलग मंत्रालयों की थी का रोमांच अभी थमा भी नहीं था कि कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ तथा एसएसबी जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के महिला और पुरूष जवानों की अलग-अलग मोटरसाइकिल सवारों की टुकडि़यों और एक संयुक्त \“डेयरडेविल्स\“ टीम ने सांसें थाम लेने वाली अपने हैरतअंगेज करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जबकि आखिर में वायुसेना के 29 विमानों ने कर्तव्य पथ पर हवाई फ्लाई-पास्ट के जरिए कर्तव्य पथ पर गौरव और रोमांच के अहसास को चरम पर पहुंचा दिया। इसमें वायुसेना के 16 लड़ाकू विमान, चार ट्रांसपोर्ट विमान और नौ हेलीकॉप्टर जिसमें राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर विमानों के साथ सी-130 और सी-295 परिवहन विमान तथा भारतीय नौसेना का पी-8आई विमान शामिल था।

इन लड़ाकू विमानों ने कर्तव्य पथ पर अर्जन, वज्रांग, वरुण और विजय फार्मेशन के जरिए कर्तव्य पथ पर आकाश में अपनी दहाड़ के साथ युद्ध कौशल का विहंगम दृश्य प्रस्तुत किया। गणतंत्र दिवस समारोह समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सिर पर गुलाबी साफा बांधे दर्शक दीर्घा के करीब जाकर कर्तव्य पथ पर कुछ दूर तक पैदल चलकर गर्मजोशी से लोगों की ओर हाथ हिलाते हुए उनका अभिवादन किया।

यह भी पढ़ें- 77वां गणतंत्र दिवस: राहुल गांधी के तीसरी पंक्ति में बैठने पर भड़की कांग्रेस, भाजपा का पलटवार; क्या है नियम?
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