राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर लगाए गए ई-डिटेक्शन सिस्टम के जरिए हर माह औसत छह करोड़ रुपये का चालान काटा जा रहा है।
टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों के फिटनेस, बीमा और प्रदूषण प्रमाण-पत्र के अपडेट नहीं रहने पर आटोमैटिक ई-चालान काटा जा रहा है।
अभी तक राज्य के 32 टोल-प्लाजा ई-डिटेक्शन से लैस थे, जल्द ही 9 और टोल प्लाजा को ई-डिटेक्शन से लैस किया जाएगा। परिवहन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
परिवहन विभाग ने राज्य में अगस्त 2024 में टोल-प्लाजा पर ई-डिटेक्शन सिस्टम से चालान काटे जाने की प्रक्रिया की शुरुआत की थी।
आंकड़ों के मुताबिक टोल प्लाजा पर सितंबर, 2025 तक एक लाख 49 हजार 490 चालान जारी किए गए है, जिसके अंतर्गत करीब 80 करोड़ रुपये का जुर्माना वाहन मालिकों पर लगाया गया है। इसमें करीब एक चौथाई चालान ही जमा हो पाया है।
परिवहन विभाग ने चालान नहीं जमा करने वाले वाहन चालकों को चिह्नित कर कार्रवाई का निर्देश सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों (डीटीओ) को दिया है।
ऐसे काम करता है ई-डिटेक्शन सिस्टम
यह प्रणाली राष्ट्रीय स्तर पर संचालित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) के तकनीकी सहयोग से जुड़ी है, जो वाहन पंजीकरण एवं संबंधित दस्तावेजों के केंद्रीय डाटाबेस से एकीकृत है। जैसे ही कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, कैमरों द्वारा उसका नंबर प्लेट या फास्टैग स्कैन किया जाता है।
इसके बाद संबंधित डाटाबेस से मिलान कर यह सत्यापित किया जाता है कि वाहन के सभी आवश्यक दस्तावेज वैध हैं या नहीं। यदि दस्तावेज अद्यतन नहीं पाए जाते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत स्वचालित रूप से ई-चालान निर्गत कर दिया जाता है।
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