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भागलपुर के उत्तरवाहिनी गंगा के बीच स्थित तीन पहाड़ियां, अद्भुत व अद्वितीय स्‍मारक, अब रोप-वे व झूला की तैयारी

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भागलपुर कहलगांव के गंगा के बीच तीन पहाड़ियां, प्राकृतिक व ऐतिहासिक स्थल, रोप-वे और झूला की तैयारी।  



जागरण संवाददाता, भागलपुर। कहलगांव विधानसभा क्षेत्र में गंगा नदी के बीच स्थित तीन पहाड़ियों के पर्यटन विकास की दिशा में पहल शुरू हो गई है। राज्य सरकार की योजना के तहत इन पहाड़ियों पर जल्द ही रोप-वे और लक्ष्मण झूला का निर्माण किया जा सकता है। इसको लेकर जिला सामान्य शाखा ने पत्र जारी कर एडीएम व एसडीएम कहलगांव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के निर्देश के अनुसार प्रस्तावित योजना में इन पहाड़ियों की भूमि स्वामित्व स्थिति, विस्तृत विवरण, नक्शा, अनापत्ति प्रमाण पत्र और निर्माण के बाद रख-रखाव की व्यवस्था सहित सभी आवश्यक बिंदुओं की जानकारी शामिल करनी होगी। एडीएम व एसडीएम कहलगांव अपनी स्तर पर जांच कर पर्यटन संभावनाओं पर ठोस रिपोर्ट तैयार करेंगे। यदि योजना को स्वीकृति मिलती है, तो गंगा के बीच स्थित ये पहाड़ियां क्षेत्र में पर्यटन को नई दिशा दे सकती हैं और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ा सकती हैं।

साथ ही, राज्य सरकार ने इन तीन पहाड़ियों को संरक्षित स्मारक घोषित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। कहलगांव के राजघाट से आगे गंगा के बीच स्थित शांति बाबा पहाड़, बंगाली बाबा पहाड़ और पंजाबी बाबा पहाड़ प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण लंबे समय से पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे हैं।

  

इस संदर्भ में कला, संस्कृति और युवा विभाग की पहल पर इन पहाड़ियों की ऐतिहासिक और पुरातात्विक जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद इन्हें बिहार प्राचीन पुरातत्व अवशेष एवं कलानिधि अधिनियम, 1976 के तहत अधिसूचित कर संरक्षित स्मारक घोषित करने की तैयारी है।

सरकार का मानना है कि संरक्षण का दर्जा मिलने से न केवल इस स्थल की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित रहेगी, बल्कि पर्यटन सुविधाओं के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु यहां शांति, ध्यान और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने आते हैं।  

इस प्रकार गंगा नदी के मध्य स्थित ये तीन पहाड़ियां न केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं। रोप-वे और झूला परियोजना के साथ ही संरक्षण की पहल इसे और अधिक सुरक्षित, आकर्षक और उपयोगी बना सकती है।
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