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आतिशी वीडियो मामले में अदालत का बड़ा फैसला, वीडियो को माना फेक; इंटरनेट से हटाने के दिए निर्देश

Chikheang Yesterday 22:27 views 800
  

आतिशी वीडियो मामले में अदालत का बड़ा फैसलाफोटो फाइल



जागरण संवाददाता, जालंधर। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी से जुड़े वीडियो विवाद मामले में जालंधर की एसीजेएम हरप्रीत कौर की अदालत ने वीरवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने सभी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म को आदेश दिए हैं कि आतिशी से संबंधित विवादित वीडियो को तुरंत हटाया जाए।

इसके साथ ही वीडियो पोस्ट करने वाले दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स से जुड़े सभी लिंक भी डिलीट करने के आदेश जारी किए गए हैं। दरअसल, आतिशी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के दौरान एक चर्चा में सिख गुरुओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था।

शिकायतकर्ता इकबाल सिंह ने पुलिस और अदालत को बताया था कि सात जनवरी को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर एक वीडियो क्लिप वायरल की गई थी। इस क्लिप में आतिशी को सिख गुरुओं और सिख समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था।

शिकायतकर्ता आइएस बग्गा उर्फ इकबाल सिंह ने जालंधर पुलिस को शिकायत दी थी कि इस वीडियो की गहन जांच करवाई जाए और इसे शेयर करने व वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के अलावा कांग्रेस के जालंधर कैंट विधायक परगट सिंह, सुखपाल सिंह खैहरा और शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल के नाम भी शामिल किए गए थे, जिनके खिलाफ जालंधर पुलिस ने एफआइआर दर्ज की थी।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वीडियो को जांच के लिए मोहाली स्थित फारेंसिक लैब भेजा। जांच में यह सामने आया कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि बाद में आतिशी ने खुद उसी भाषण का पूरा और असली वीडियो इंटरनेट मीडिया पर सांझा किया।

इस वीडियो से यह स्पष्ट हो गया कि वायरल की गई क्लिप को जानबूझकर एडिट और डाक्टर्ड किया गया था, ताकि उनके बयानों का अर्थ बदला जा सके और धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सके।

वीरवार को जालंधर पुलिस की तरफ से एडीसीपी नवीन अहलावत और इंस्पेक्टर रविंदर कुमार अदालत में पेश हुए और उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर चल रही सारी वीडियो डिलीट करने की मांग रखी थी, जिस पर अदालत सुनवाई करते हुए रोक लगाने के आदेश दे दिए।

अदालत ने सुनवाई के दौरान इंटरनेट मीडिया के दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की छवि खराब करने या समाज में नफरत फैलाने के लिए एडिटेड और भ्रामक सामग्री का प्रसार गंभीर अपराध है। कोर्ट के आदेश के बाद अब इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म्स से वीडियो हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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