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सुसाइड के लिए उकसाने के लिए जीवित पार्टनर क्रिमिनल तौर पर जिम्मेदार, SC का अहम फैसला

cy520520 5 hour(s) ago views 694
  

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि आपसी सुसाइड एग्रीमेंट में जीवित पार्टनर दूसरे की मौत के लिए उकसाने के लिए क्रिमिनल तौर पर जिम्मेदार है, साथ ही उसने गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी को दी गई दो साल की सजा को भी बरकरार रखा। रेड्डी साउथ इंडियन फिल्म एक्ट्रेस पत्यूषा के साथ रिलेशनशिप में थे, जब उन्होंने 2002 में जहर खाकर जान दे दी थी।

जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने माना की सुसाइड एग्रीमेंट करने और उस पर काम करने में रेड्डी का व्यवहार आईपीसी के सेक्शन 107 के तहत उकसाने के दायरे में पूरी तरह से आता है। कोर्ट ने कहा कि उनके शामिल होने से एक्ट्रेस की सुसाइड में सीधे मदद मिली और इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 306 के तरह क्रिमिनल जिम्मेदारी बनती है।
चार हफ्ते से अंदर सरेंडर करने का निर्देश

कोर्ट ने रेड्डी को अपनी बाकी सजा काटने के लिए चार हफ्ते से अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया, जबकि कोर्ट ने प्रत्यूषा की मां की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया जिसमें रेड्डी पर मर्डर और रेप के जुर्म में केस चलाने की मांग की गई थी। बेंच ने ऐसे आरोपों को साबित करने के लिए सबूतों की कमी पर ध्यान दिया।

प्रत्यूषा, जिसने कई साउथ इंडियन फीचर फिल्मों में हीरोइन के तौर पर काम किया था, और रेड्डी उस समय इंजीनियरिंग स्टूडेंट थे। दोनों एक-दूसरे को लगभग 10 साल से जानते थे और शादी करना चाहते थे। हालांकि उसकी मां आखिरकार इस रिश्ते के लिए मान गईं, लेकिन रेड्डी के परिवार ने इसका विरोध किया और उसकी मां को कथित तौर पर धमकी दी गई कि उसने शादी की तो वह सुसाइड कर लेगी।
2002 में प्रत्यूषा ने किया था सुसाइड

23 फरवरी, 2002 को, प्रत्यूषा को उसकी मां की धमकी के बारे में बताने के बाद, कपल एक ब्यूटी पार्लर में मिले और साथ में निकल गए। बाद में उसी शाम, जहर खाने के बाद दोनों को केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। रेड्डी बच गए और मार्च 2002 में उन्हें छुट्टी दे दी गई, लेकिन प्रत्यूषा की मौत हो गई।

प्रॉसिक्यूशन का केस यह था कि कपल ने नुवाक्रॉन एक ऑर्गनोफॉस्फेट पेस्टिसाइड को सॉफ्ट ड्रिंक में मिलाकर पिया था। सबूतों से पता चला कि रेड्डी ने घटना से कुछ समय पहले हैदराबाद की एक दुकान से पेस्टीसाइड खरीदा था।

इस मामले में तब बहुत विवाद हुआ जब एक पोस्टमॉर्टम डॉक्टर ने फॉरेंसिक रिपोर्ट आने से पहले ही सबके सामने हाथ से गला घोंटने और सेक्सुअल असॉल्ट का सुझाव दिया। इस दावे से लोगों में गुस्सा भड़क गया और CBI जांच की मांग की गई, जिसका आदेश मार्च 2002 में दिया गया।
कोर्ट ने फैसले में सुसाइड पैक्ट का जिक्र किया

जस्टिस मनमोहन के लिखे फैसले में सुसाइड पैक्ट पर कानून को बताया गया। कोर्ट ने साफ किया कि IPC की धारा 107 के तहत उकसाना सिर्फ मौत का तरीका देने तक ही सीमित नहीं है। साइकोलॉजिकल भरोसा, आपसी वादा और आपसी हिम्मत अगर जानबूझकर और सीधे काम से जुड़ा हो, तो भी उकसाना माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा

सेशंस कोर्ट ने शुरू में रेड्डी को पांच साल जेल की सजा सुनाई थी। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 2011 में उकसाने के लिए सजा घटाकर दो साल कर दी थी। हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अपील को बेकार बताते हुए खारिज कर दिया और रेड्डी को चार हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया।

यह भी पढ़ें- \“पायजामे का नाड़ा ढीला करना रेप की कोशिश\“, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद HC का विवादित फैसला
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