ईरान में तख्तापलट से भारत का नुकसान
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ईरानी सरकार इन प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। वहीं अमेरिका प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है और ईरानी सरकार पर अटैक करने की धमकी दे रहा है।
ईरान के मुद्दे पर भारत शांति से नजर बनाए हुए है। नई दिल्ली और तेहरान के बीच बेहतर रिश्ते हैं, लेकिन ईरान में तख्तापलट से भारत का नुकसान हो सकता है। वहीं इसमें पाकिस्तान और चीन का एक बड़ा फायदा है।
भारत को होगा बड़ा नुकसान
पाकिस्तान ने भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के जमीनी मार्ग को बंद किया हुआ है। लेकिन ईरान ने भारत के लिए अपने रास्ते खोले हुए हैं। भारत, ईरान के जमीनी मार्ग का इस्तेमाल मध्य एशिया के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए कर रहा है। ईरान में तख्तापलट से भारत के रणनीतिक दांव-पेच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भारत की रणनीति के केंद्र में ईरान का चाबहार बंदरगाह है, जिसे नई दिल्ली को ईरानी तट तक जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है, जो पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए भारत को भूमि और रेल नेटवर्क के माध्यम से मध्य एशिया से जोड़ता है।
पाकिस्तान-चीन का फायदा
मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद, ईरान ने एतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित बनाए रखा है। तेहरान का शिया नेतृत्व पाकिस्तान के सुन्नी चरमपंथी समूहों का मुखर आलोचक रहा है। 1990 के दशक के मध्य में इस्लामाबाद ने कश्मीर मुद्दे पर भारत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने का दबाव बनाया, तब भी तेहरान ने दिल्ली की मदद की।
ईरान के चीन के साथ रिश्ते पहले से ही बेहतर हैं। 2021 में बीजिंग और तेहरान के बीच 25 वर्षीय रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। यदि ईरान में तख्तापलट होता भी है तो नई सरकार के भी सुरक्षा और निवेश के लिए बीजिंग पर निर्भर रहने की संभावना है।
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