अमेरिका ने चली नई चाल मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हुआ US का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वॉशिंगटन ने बड़ा सैन्य कदम उठाया है। पेंटागन ने दक्षिण चीन सागर में तैनात अपने एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट भेजने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं और अमेरिका की नजर वहां की स्थिति पर बनी हुई है।
अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन के मुताबिक, यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के इलाके में तैनात किया जा रहा है, जिसमें पूरा मिडिल ईस्ट शामिल है। अमेरिकी न्यूज नेटवर्क न्यूज नेशन ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस स्ट्राइक ग्रुप में एक एयरक्राफ्ट कैरियर, कई युद्धपोत और कम से कम एक अटैक सबमरीन शामिल है। इस पूरे समूह को मिडिल ईस्ट पहुंचने में करीब एक हफ्ते का समय लग सकता है। बताया जा रहा है कि USS अब्राहम लिंकन इस मिशन का हिस्सा है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैयारी बढ़ी
यह तैनाती अमेरिका की सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है। यह कदम ऐसे वक्त पर उठाया गया है जब ईरान में महंगाई, आर्थिक संकट और शासन के खिलाफ जनता का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।
CENTCOM का इलाका करीब 40 लाख वर्ग मील में फैला है जिसमें मिस्र, इराक, अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान समेत कुल 21 देश शामिल हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस तैनाती के मकसद को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। इसके बावजूद, यह कदम साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि अमेरिका क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर हाई अलर्ट पर है और अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रहा है।
अमेरिकी दूतावासों पर सतर्कता
इससे पहले CNN ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डे अल उदैद एयर बेस (कतर) पर तैनात कुछ कर्मचारियों को एहतियातन वहां से जाने की सलाह दी गई है। यह फैसला तत्काल खतरे की बजाय सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए लिया गया है।
इसी बीच, सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास ने भी अपने कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने, सैन्य ठिकानों की गैर-जरूरी यात्राएं टालने और व्यक्तिगत सुरक्षा योजनाएं तैयार रखने को कहा है।
ईरान के पड़ोसी देशों में भी चिंता बढ़ रही है। उन्हें डर है कि अगर ईरान पर कोई सैन्य कार्रवाई हुई, तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई देश सीधे ट्रंप प्रशासन से अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं।
ईरान पर गुप्त विकल्पों पर विचार
CBS न्यूज के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य और गुप्त अभियानों से जुड़े कई विकल्पों की जानकारी दी गई है। इसमें सिर्फ हवाई हमले ही नहीं, बल्कि सैन्य, साइबर और मनोवैज्ञानिक अभियान भी शामिल हैं।
यह जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग के दो अधिकारियों ने दी है, जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर बात की। अमेरिका ने ईरान को प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर चेतावनी भी दी है।
इस बीच, ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन 18वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं। अब तक 187 शहरों में 617 प्रदर्शन, 18,470 गिरफ्तारियां और 2615 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि देश में संचार सेवाओं पर रोक बनी हुई है।
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