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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अदालत की लाइव-स्ट्रीम कार्यवाही के कथित दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए यूट्यूब और इंस्टाग्राम को 48 घंटों के भीतर आपत्तिजनक यूआरएल हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने रील, क्लिप और मीम्स के जरिए कोर्ट प्रोसीडिंग्स को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी।
जनहित याचिका में उठे गंभीर सवाल
दमोह निवासी विजय बजाज द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही इस तरह की सामग्री कानूनी बिरादरी को अपमानजनक और भ्रामक तरीके से प्रस्तुत करती है। याचिका में तर्क दिया गया कि अदालत की कार्यवाही की चयनात्मक क्लिपिंग और सनसनीखेज प्रस्तुति न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है और न्यायिक टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर दिखाया जा रहा है।
पहले से लागू हैं सख्त नियम
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग नियम, 2021 के नियम 11(बी) के तहत किसी भी व्यक्ति या संस्था को अदालत की लाइव-स्ट्रीम सामग्री को संपादित करने, उसमें छेड़छाड़ करने या अवैध उपयोग की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद आपराधिक मामलों की शॉर्ट वीडियो क्लिप, रिकॉर्डिंग और रील्स लगातार सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपलोड की जा रही हैं।
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आपत्तिजनक URL की सूची सौंपी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मौजूद आपत्तिजनक यूआरएल की सूची अदालत के समक्ष पेश की। इस पर संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने दोनों प्लेटफार्मों को आदेश की प्रति मिलने के 48 घंटे के भीतर इन यूआरएल तक पहुंच को अवरुद्ध करने के निर्देश जारी किए।
अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि न्यायिक कार्यवाही की गरिमा से खिलवाड़ करने वाले मामलों में सख्त रुख अपनाया जाएगा। |
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