मजार का मुख्य गुंबद तोड़े जाने के बाद का दृश्य। जागरण
जागरण संवाददाता, देवरिया। बंजर भूमि पर मजार व कब्रिस्तान का फर्जी इंद्राज कराने के मामले में तहसील प्रशासन अब पूरे प्रकरण की कुंडली तैयार कर रहा है। जांच की जद में तत्कालीन लेखपालों व अन्य राजस्वकर्मियों की भूमिका भी आ सकती है।
प्रशासन का मानना है कि कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह फर्जीवाड़ा संभव नहीं था। फिलहाल मजार की देखरेख करने वाली समिति के उन पदाधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी है, जो फर्जी इंद्राज के समय जिम्मेदार पदों पर थे।
गोरखपुर रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज से सटे मेहड़ा नगर अंदर, तप्पा धतुरा में स्थित मजार व कब्रिस्तान नान-जेड ए श्रेणी की भूमि पर बना था। वर्ष 1399 फसली की खतौनी में बंजर दर्ज था, जिसका कुल रकबा 0.124 हेक्टेयर है। वर्ष 1992 में एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय से जारी एक फर्जी परवाना प्रस्तुत कर भूमि को मजार व कब्रिस्तान के रूप में दर्ज करा दिया गया था।
इस मामले में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता की ओर से राजस्व अभिलेख दुरुस्ती का वाद दाखिल किया गया था। एएसडीएम की कोर्ट ने सुनवाई के बाद अभिलेख दुरुस्त करने का आदेश दिया, जिसके अनुपालन में तहसील प्रशासन ने भूमि को पुनः बंजर दर्ज किया।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय में स्पष्ट किया था कि तत्कालीन लेखपालों व कलेक्ट्रेट कर्मचारियों की संलिप्तता के बिना इस प्रकार का फर्जीवाड़ा संभव नहीं है।
प्रशासन अब उस समय तैनात लेखपालों, कलेक्ट्रेट कर्मचारियों और समिति से जुड़े लोगों की भूमिका की गहनता से जांच कर रहा है। एसडीएम सदर श्रुति शर्मा ने बताया कि तहसीलदार को मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द ही दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी है राजस्व अभिलेखों में कूटरचना
राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि हड़पने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2025 में केंद्रीय विद्यालय को आवंटित भूमि से जुड़े अभिलेखों में भी कूटरचना का मामला सामने आ चुका है।
उस प्रकरण में राजस्व अभिलेखापाल संजय कुमार की ओर से काबिज लोगों के साथ ही अभिलेखागार के कस्टोडियन, नायब हिंदी और बस्ता बरदार (चपरासी) के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसकी विवेचना अभी जारी है।
शहर से सटे अमेठी (नगर बाहर) क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय भवन निर्माण के लिए 3.914 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई थी। कुछ लोगों ने इस भूमि पर स्वामित्व का दावा करते हुए कथित रूप से कूटरचित अभिलेखों के आधार पर न्यायालयों में वाद दाखिल किए।
डीएम दिव्या मित्तल के निर्देश पर तत्कालीन सीआरओ जलराजन चौधरी की अध्यक्षता में गठित समिति की जांच में स्पष्ट हुआ कि वर्ष 2018 से 2021 के बीच 1332 फसली खतौनी से लेकर चकबंदी जिल्द तक में कूटरचना की गई थी। |
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