जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती छात्राओं के बारे में जानकारी लेते डीएम डा़ राजा गणपति आर
दुर्गेश द्विवेदी, जागरण सीतापुर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (केजीबीवी) रेउसा में 12 दिसंबर 2025 को 14 बालिकाओं की तबीयत खराब हो गई थी। समय पर इलाज न मिलता तो यहां भी इंदौर जैसे हालात बन जाते। विद्यालय का पानी माइक्रो बायोलोजिकल (जीवाणु) और केमिकल (रासायनिक) विश्लेषणों में अति प्रदूषित निकला है।
माइक्रो बायोलोजिकल जांच में पानी में खतरनाक स्तर पर ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। इंदौर में यही बैक्टीरिया लोगों की मौत का कारण बना था। विद्यालय के पानी की कठोरता (क्लोराइड्स, नाइट्राइट्स, नाइट्रेट्स आदि घुलनशील केमिकल) के प्रदूषण का स्तर भी संतोषजनक नहीं है। इसकी पुष्टि राज्य स्वास्थ्य संस्थान की रिपेार्ट से हुई है।
छात्रा सुहानी, शालिनी, जुगनी, ज्योति रस्तोगी, पल्लवी, अंशिका, शशि, अंकिता, खुशबू, निधि, शिल्पी, गीता, आंचल व साक्षी की तबीयत बिगड़ गई थी। सुधार न होने पर पल्लवी और ज्योति को लखनऊ रेफर कर दिया गया था।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग की स्टेट सर्विलांस टीम से जांच कराई थी। इसमें टीम ने मनोविकार का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया था। उधर, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पानी के दो नमूने भरे थे। एक नमूना टंकी और दूसरा आरओ के पानी का भरा गया था।
राज्य स्वास्थ्य संस्थान की ओर से नमूनों के कराए गए विश्लेषण की रिपोर्ट चौकाने वाली आई है। टंकी के प्रत्येक 100 मिली लीटर पानी में 12 ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले, मानक अनुसार संख्या शून्य होनी चाहिए। किसी भी हाल में संख्या तीन से अधिक नहीं होनी चाहिए।
वहीं, शुद्धता की गारंटी सुनिश्चित करने वाले रिवर्स आस्मोसिस (आरओ) के पानी में 11 बैक्टीरिया निकले और अन्य अशुद्धियां भी पाई गईं। एफएसडीए ने विश्लेषण रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी है। प्रशासन की ओर से समस्या के निदान पर काम शुरू कर दिया गया है।
मल से पानी में पहुंचता ई-कोलाई बैक्टीरिया
पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मानव व पशु मल से पहुंचता है। यह, सेप्टिक टैंक और सीवेज पाइपलाइन में रिसाव के अलावा तालाबाें व झीलों में गंदगी होने पर भी पानी में पहुंच जाता है।
ई-कोलाई संक्रमण से फेल हो सकती किडनी
जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. अनुपम मिश्र ने बताया कि ई-कोलाई हैमरेजिक (गंभीर) पाचन विकार का जनक है। पेट में तेज ऐंठन, पानी जैसे दस्त, मतली और उल्टी, हल्का बुखार और थकान शुरुआती लक्षण हैं। लक्षण गंभीर होने पर खूनी दस्त आने लगते हैं और प्लेटलेट्स भी कम हो जाते हैं। किडनी भी फेल हो जाती है।
दूषित पानी पीने से छात्राओं की तबीयत बिगड़ी थी। भविष्य में इस तरह की घटना को रोकने के लिए विद्यालय में 180 फीट गहरा ट्यूबवेल बनवाया जा रहा है। पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया कैसे पहुंचा, इसकी गंभीरता से जांच कराई जा रही है।
डॉ. राजा गणपति आर., जिलाधिकारी |