पापहरणी सरोवर पर पहुंचे सफा मताबलंवी
संवाद सहयोगी, बौंसी (बांका)। आगामी 11 से 14 जनवरी तक आयोजित होने वाले मंदार महोत्सव सह बौंसी मेले के दौरान मंदार पर्वत स्थित पापहरणी सरोवर में संताली बलिदानियों के मोक्ष की प्राप्ति को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। इस अवसर पर अखिल भारतीय हिंदू सनातन सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा।
घर वापसी कराएगा आरएसएस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में संताली समाज के वीर बलिदानियों के लिए मोक्ष प्राप्ति का कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही ईसाई धर्म अपना चुके हजारों हिंदुओं की घर वापसी का कार्यक्रम भी आयोजित है। इस संदर्भ में धर्मरक्षक मनीष कुमार ने बताया कि इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से संताल समाज के लोग बड़ी संख्या में भाग लेंगे। सम्मेलन में संथाल समाज के महान बलिदानी सिदो-कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू, वीरांगनाएं फूलो-झानो मुर्मू सहित सैकड़ों बलिदानियों की स्मृति में मोक्ष प्राप्ति कार्यक्रम भी होगा।
सफा सनातनी मंदार पहुंचे
शुक्रवार को असम, नेपाल, पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार और झारखंड से बड़ी संख्या में सफा सनातनी मंदार पहुंचे। झारखंड के देवघर जिले से दो बसों में लगभग 200 सफेद वस्त्रधारी सफा मतावलंबियों ने मंदार में डेरा डाला है। गुरु चुनीलाल मुर्मू ने बताया कि ये लोग 24 घंटे मंदार में निवास कर पूजा-अनुष्ठान के बाद वापस लौटेंगे। उन्होंने कहा कि मंदार पर्वत संताल समाज का इष्ट देव स्थल है।
अखिल भारतीय सनातन संताल समाज सक्रिय है
अखिल भारतीय सनातन संताल समाज की ओर से नवनिर्मित मंदिर में संताली संत शिवू मुर्मू की प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गुरुमाता रेखा हेंब्रम ने बताया कि यह मार्बल की प्रतिमा राजस्थान से मंगाई गई है। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा 12 जनवरी को मंदार परिक्रमा के उपरांत की जाएगी। परिक्रमा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसके बाद दो दिनों तक कई प्रकार के धार्मिक आयोजन व सत्संग सहित भजन-कीर्तन का आयोजन होगा।
सदियों से है यह परंपरा
ज्ञात हो कि मंदार क्षेत्र में जनवरी माह की शुरुआत से मकर संक्रांति तक प्रतिदिन विभिन्न राज्यों से संताल समाज के लोग पापहरणी सरोवर में स्नान कर पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। सुख-शांति और समृद्धि की कामना को लेकर मंदार आने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। |
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