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यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियां की पूरी बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्यपुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ( एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा।
जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते है। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल है। शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे है, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी।
सात ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का ऐलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी।
शुरू कर सकता है नए कोर्स
सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है।
एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी।
वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।
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