राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार चाहती है कि प्रदेश की सभी रोलर फ्लोर मिलें पूरी क्षमता के साथ संचालित हों और नए उद्योग भी स्थापित हों। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य भी मिलेगा।
यह बात प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित वर्कशाप में कही। उन्होंने कहा कि लक्ष्य उत्तर प्रदेश को जल्द ही एक प्रमुख उत्पादक राज्य के रूप में स्थापित करना है, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिले। एसोसिएशन ने उनसे मांग की कि फ्लोर मिलों को गेहूं की खरीद पर बिना शर्त मंडी शुल्क से छूट दी जाए।
राजधानी के एक होटल में आयोजित इस वर्कशाप का मुख्य उद्देश्य संवाद से विकास रहा। कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्यान, कृषि विपणन एवं कृषि निर्यात दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते जा रहे हैं।
ये उद्योग न केवल राज्य के राजस्व को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित कर रहे हैं और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम के संयोजक और राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे और मजबूत कानून व्यवस्था के कारण उत्तर प्रदेश आज उद्योगों के लिए अनुकूल राज्य बन रहा है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने बताया कि प्रदेश देश में गेहूं उत्पादन में पहले स्थान पर है, जहां करीब 360 लाख टन गेहूं का उत्पादन होता है।
इसके बावजूद प्रदेश की 350 से अधिक फ्लोर मिलें अपनी कुल क्षमता का केवल 35 से 40 प्रतिशत ही उपयोग कर पा रही हैं। मौके पर मंडी परिषद के सचिव इंद्र विक्रम सिंह सहित प्रदेश भर से बड़ी संख्या में उद्योगपति और उद्यमी मौजूद रहे। |
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