पिछली बार की तुलना में द्रमुक से अधिक सीटों की मांग कर रही है कांग्रेस
संजय मिश्र, जागरण। तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की नए चुनावी गठबंधन के विकल्प पर शुरू की गई सियासी सरगर्मियों को दरकिनार करते हुए कांग्रेस हाईकमान ने साफ कर दिया है कि राज्य विधानसभा के चुनाव में पार्टी अपने पुराने भरोसेमंद सहयोगी द्रमुक संग ही गठबंधन कायम रखेगी।
इस फैसले के साथ ही कांग्रेस नेतृत्व ने तमिलनाडु की राजनीति में नए उभरते खिलाड़ी माने जा रहे फिल्म स्टार विजय की पार्टी टीवीके के साथ चुनावी तालमेल की पैरोकारी कर रहे प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के एक वर्ग की सियासी पहल को पंक्चर कर दिया है। हालांकि पार्टी ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि तमिलनाडु के अपने नेताओं की राजनीतिक आकांक्षाओं के अनुरूप सीट बंटवारे में पिछली बार की तुलना में द्रमुक से अधिक सीटों की मांग कर रही है।
टीवीके संग गठबंधन चाहता है एक वर्ग
कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी देने की विजय की पेशकश को देखते हुए तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं का यह वर्ग द्रमुक की बजाय टीवीके संग गठबंधन की तरफदारी कर रहा था। इसमें पार्टी के कुछ एक सांसद तथा विधायक भी शामिल थे। लेकिन तमिलनाडु ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी आइएनडीआइए गठबंधन में कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ी द्रमुक को छोड़ने के विकल्प पर गौर करना भी फिलहाल पार्टी नेतृत्व मुनासिब नहीं मानता।
इसलिए तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं को हाईकमान ने राज्य के एआइसीसी प्रभारी गिरीश चोढ़नकर के जरिए स्पष्ट संदेश दे दिया है कि विधानसभा चुनाव में गठबंधन का एकमात्र विकल्प द्रमुक ही है। पार्टी हाईकमान के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने तो इस बारे में अनौचारिक बातचीत करते हुए कहा कि सौ प्रतिशत नहीं बल्कि यह दस हजार प्रतिशत तय है कि विधानसभा चुनाव में द्रमुक के साथ ही कांग्रेस का गठबंधन होगा। कांग्रेस नेतृत्व वाले आइएनडीआइए गठबंधन में सपा के बाद लोकसभा में संख्या बल के हिसाब से द्रमुक दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।
स्टालिन और गांधी परिवार के संबंध
इतना ही नहीं कांग्रेस के शीर्षस्थ नेतृत्व विशेषकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ द्रमुक प्रमुख तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के करीबी आपसी संबंध हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए अहम राजनीतिक मुद्दों का स्टालिन ने न केवल लगातार मुखर समर्थन किया है बल्कि कई अवसरों पर उनका नैतिक समर्थन करने के लिए पहुंचे भी हैं।
चाहे वह 2022 की राहुल गांधी की चर्चित भारत जोड़ो यात्रा रही हो या अभी बिहार चुनाव से पूर्व वोट चोरी के खिलाफ निकाली गई यात्रा इनमें शामिल होकर स्टालिन ने मजबूती से उनके साथ खड़े होने का संदेश दिया। ऐसे में विजय की टीवीके पार्टी के नए प्रयोग में शामिल होने का कांग्रेस जोखिम नहीं लेगी। द्रमुक के साथ गठबंधन में कोई अड़चन नहीं है इसका प्रमाण यह भी है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस की उसके साथ बातचीत शुरू हो चुकी है।
40-45 सीटों की मांग कर रही कांग्रेस
बताया जाता है कि तमिलनाडु कांग्रेस के नेता पार्टी की प्रतिष्ठा के अनुरूप इस बार विधानसभा चुनाव में 40-45 सीटों की मांग कर रहे हैं। प्रारंभिक बातचीत में द्रमुक ने भी कांग्रेस की मांग को देखते हुए कुछ सीटें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। द्रमुक ने फिलहाल 32 सीटें देने के संकेत दिए हैं मगर कांग्रेस कम से कम 38-40 सीटें चाह रही है। कांग्रेस को 2021 के विधानसभा चुनाव में द्रमुक ने केवल 25 सीटें ही दी थी जो दोनों दलों के दो दशक के गठबंधन में सबसे कम थी।
हालांकि कांग्रेस इन 25 में से 17 सीटों पर चुनाव जीत गई थी। द्रमुक के साथ गठबंधन का फायदा कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मिला जब तालमेल में नौ सीटों पर चुनाव लड़कर पार्टी सभी सीटें जीत गई। जाहिर तौर पर इसे देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व नए प्रयोग का जोखिम नहीं उठाना चाहता। |