जागरण संवाददाता, औरैया। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की मान्यता मिल जाने व स्कूल खोलकर रोजगार देने का झांसा देकर रिश्तेदारों और अन्य लोगों से ठगी के मामले में न्यायालय सिविल जज ने शनिवार को सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, उनकी पत्नी व बेटे को सजा सुनाई।
तीनों के विरुद्ध वर्ष 2017 में दिबियापुर थाने में इटावा निवासी रिश्तेदार ने मुकदमा दर्ज कराया था। कोर्ट ने दोषियों को तीन साल का साधारण कारावास सुनाते हुए 1.80 लाख रुपये अर्थदंड लगाया। फैसले से 90 दिनों तक अपील न किए जाने की सूरत में तीनों को जेल भेजने की कार्रवाई होगी।
इटावा जनपद के बकेवर थाना अंतर्गत गांव भरेईपुर निवासी शैलेंद्र सिंह ने दिबियापुर के हरी का पुर्वा गांव निवासी महावीर सिंह, उनकी पत्नी रुकमणि और बेटे अरविंद कुमार के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा पंजीकृत कराया था।
आरोप था कि शैलेंद्र की पत्नी से नौकरी दिलाने की बात कहकर दो लाख 25 हजार रुपये लिए गए थे। पुलिस के द्वारा गुणवत्तापूर्ण विवेचना व अभियोजन की प्रभावी पैरवी के तहत न्यायालय सिविल जज (जूनियर डिविजन एफटीसी) विजय प्रकाश ने नौकरी का झांसा देकर रुपये हड़पने का दोषी ठहराते हुए महावीर, उनकी पत्नी व बेटे के विरुद्ध सजा सुनाई।
अभियोजन अधिकारी प्रीति लता ने बताया कि कोर्ट के आदेशानुसार अर्थदंड की धनराशि एक महीने के अंदर न जमा किए जाने की सूरत में तीनों को एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
प्राथमिक विद्यालय नगला जयसिंह से हुए थे सेवानिवृत्त
महावीर सिंह प्राथमिक विद्यालय नगर जयसिंह भाग्यनगर ब्लाक में प्रधानाध्यापक पद पर थे। वर्ष 1994-95 के मध्य सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने ककोर के पास सीबीएसई स्कूल खोलने की बात कहकर बिल्डिंग बनवाना शुरू किया था। स्कूल का बोर्ड लगाया।
आसपास के लोगों और रिश्तेदारों से लाखों रुपये उधार ले लिए थे। इसके एवज में नौकरी दिलाने की बात भी कही। कहा कि स्कूल में विभिन्न पदों पर नियुक्ति होनी है। महावीर के पिता छोटेलाल साल 1963 से 1986 तक प्रधान रहे थे। महावीर के दोनों भाई सरकारी नौकरी में रहे। |
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