प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिए संकेत।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को लागू करने के बाद सरकार जल्द ही नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के अमल को लेकर घोषणा करने जा रही है। पिछले सप्ताह सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके संकेत दिए।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में आत्मनिर्भर भारत और जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत तक ले जाने के लिए नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इस मिशन की विस्तृत गाइडलाइंस या इस मिशन को आगे बढ़ाने को लेकर कोई ऐलान नहीं किया गया है।
हालांकि नीति आयोग ने पिछले साल नवंबर में ही मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के लागू होने की बात कही थी। मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के अमल को ध्यान में रखते हुए सभी राज्यों को इसके हिसाब से तैयारी करने के लिए कहा गया है ताकि मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के तहत वे अपने यहां वैश्विक निवेश को आकर्षित कर सके।
बाधाओं को दूर करने के लिए किए जाएंगे उपाय
नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के तहत निर्माण के रास्ते में आने वाली बड़ी बाधाओं को दूर करने के उपाय किए जाएंगे। मुख्य रूप से जमीन की अनुपलब्धता, बड़ी संख्या में कुशल कारीगर की कमी, अपर्याप्त लाजिस्टिक जैसी कमियों को दूर करने की कोशिश की जाएगी। देश के हर भाग में मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़े निवेश को लाने की कोशिश होगी ताकि मैन्यूफैक्चरिंग के मामले में एक संतुलित विकास हो सके।
देश को पांच क्षेत्र में बांट कर ऐसे क्लस्टर का निर्माण किया जाएगा जहां नए उद्यमियों को निर्माण से जुड़ी सभी सुविधाएं मिलेंगी। अभी विभिन्न प्रकार की बाधा और जमीन की कमी की वजह से मैन्यूफैक्चरिंग में नए उद्यमी काफी कम संख्या में आ रहे हैं।
स्टार्टअप की भारी कमी
मैन्यूफैक्चरिंग में स्टार्टअप की भी भारी कमी है। पिछले दस सालों से जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 15-17 प्रतिशत के बीच चल रही है। वर्ष 2047 तक विकसित देश बनने के लिए जीडीपी विकास दर को लगातार 8-9 प्रतिशत रखना होगा और जीडीपी के 30-35 प्रतिशत तक मैन्यूफैक्चरिंग में निवेश की भी जरूरत होगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मैन्यूफैक्चरिंग प्रधान बनाना उद्देश्य
सूत्रों का कहना है कि मैन्यूफैक्चरिंग मिशन का मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को कृषि प्रधान की जगह मैन्यूफैक्चरिंग प्रधान बनाना है। मिशन के तहत रोजगारपरक सेक्टर के साथ हाई-टेक मैन्यूफैक्चरिंग को तरजीह देने की स्कीम बनाई जाएगी। अभी भारत मशीनरी के लिए मुख्य रूप से आयात पर ही निर्भर करता है।
मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के तहत मशीनरी के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। विदेश में जाकर मैन्यूफैक्चरिंग शुरू करने को लेकर भी सरकारी समर्थन मिल सकता है। दुनिया के कई देशों में कुशल श्रमिकों की कमी को देखते हुए मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट बंद की जा रही है। इसलिए भारत के पास उन देशों में भी मैन्यूफैक्चरिंग शुरू करने या फिर सामान बेचने का बड़ा मौका है।
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