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भागलपुर के छात्र कैसे बदल रहे अपने शहर को? DTK Dutta Contest में मिली अनोखी सीख

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Thomas Tushar Dutta के प्रेरणाश्रोत Father Thomas NM



जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर, बिहार– पिछले वर्ष भागलपुर में DTK Dutta Contest नामक सामाजिक शोध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य उच्च विद्यालय के छात्रों में सामाजिक भागीदारी और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना था। इस पहल के पीछे थॉमस तुषार दत्ता {Thomas Tushar Dutta) का प्रयास है, जो वर्तमान में ब्राउन यूनिवर्सिटी, अमेरिका में फिजिक्स पीएचडी कर रहे हैं। थॉमस ने 2016 में भागलपुर के सेंट जोसेफ स्कूल से ICSE पूरा किया और 2023 में IISER कोलकाता से बीएस-एमएस फिजिक्स की डिग्री हासिल की। उनके मार्गदर्शन और सक्रिय प्रयासों से यह परियोजना सफल हुई।
शुरुआती प्रशिक्षण और प्रस्ताव

प्रतियोगिता में शहर के छह विद्यालयों से कक्षा 9 के छात्रों की टीमों का चयन किया गया। प्रत्येक टीम में चार छात्र थे और उन्हें दो से तीन मेंटर्स का मार्गदर्शन मिला, जिन्होंने नौ महीनों तक उनका सहयोग किया। प्रतियोगिता की शुरुआत में छात्रों को अपने आस-पास का अवलोकन करने और शहर से जुड़े प्रश्न विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रारंभिक चार महीनों के दौरान प्रत्येक टीम ने अपने चुने हुए प्रश्न का औचित्य साहित्यिक स्रोतों और प्रारंभिक खोज के आधार पर प्रस्ताव (प्रोपोज़ल) के रूप में प्रस्तुत किया।

  
अध्ययन और खोज के पांच महीने

इसके बाद पांच महीनों तक छात्रों ने अपने अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए पड़ोसियों, व्यापारियों और सरकारी कार्यालयों का साक्षात्कार किया, स्थानीय आयोजनों और कला पहलुओं को समझा, और अपनी पढ़ाई के साथ संतुलन बनाए रखा। टीमों ने विभिन्न सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों पर काम किया। कुछ ने भागलपुर में स्ट्रीट फूड और रेस्टोरेंट्स के खाद्य एवं व्यापार लाइसेंस की स्थिति की जांच की, जबकि कुछ ने छठ पूजा के पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय जागरूकता पहलों का अध्ययन किया। परियोजना के अंत में टीमों ने अपने अनुभव और निष्कर्षों को विस्तृत रिपोर्ट और वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से साझा किया।
पुरस्कार और मान्यता

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों में अपने आस-पास के समाज पर सवाल उठाने और समाधान खोजने की क्षमता को बढ़ाना था। विजेता टीम के प्रत्येक सदस्य को ₹25,000 की पुरस्कार राशि दी जाएगी, जबकि अन्य टीमों के प्रत्येक सदस्य को ₹10,000 सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को उनके परिश्रम की सराहना के लिए प्रमाणपत्र और स्मृति-चिह्न भी प्रदान किया जाएगा।
आलोचनात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी

थॉमस तुषार दत्ता के प्रयासों से यह पहल छात्रों में आलोचनात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सफल रही। उन्हें यह भी सिखाया गया कि समाज और पर्यावरण की चुनौतियों पर शोध कर समाधान खोजना न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि प्रेरणादायक भी है।

    
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