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IPS पूरन कुमार सुसाइड केस, पूर्व DGP शत्रुजीत कपूर समेत 10 अफसरों के बयान दर्ज, SIT की अंतिम रिपोर्ट पर पूरे हरियाणा की नजर

cy520520 2025-12-19 00:37:21 views 842
  

आईपीएस पूरन कुमार केे आत्महत्या मामले में तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत कपूर पर भी आरोप लगे हैं।



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार के आत्महत्या मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) जांच को तेजी से आगे बढ़ा रही है। आत्महत्या स्थल से मिले फाइनल नोट में नामित 14 आईपीएस व आईएएस अधिकारियों में से अब तक 10 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इनमें हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत कपूर भी शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में 14 दिसंबर को पद से हटा दिया गया था। फाइनल नोट में नामित चार अधिकारियों के बयान अभी दर्ज किए जाने बाकी हैं, जिन्हें एसआईटी ने नोटिस जारी कर तलब किया है।

एसआईटी का दावा है कि जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे प्रदेश की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

एसआईटी ने अदालत को अवगत कराया था कि निर्धारित 60 दिनों की अवधि में चालान पेश नहीं किया जा सका, क्योंकि कई वरिष्ठ अधिकारियों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण लंबित था। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अब मामला निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।

घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, काॅल डिटेल रिकार्ड, दस्तावेज और फाइनल नोट में किए गए उल्लेखों की बारीकी से जांच कर रही है। अब तक करीब 60 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पारिवारिक सदस्य, करीबी परिचित और अन्य महत्वपूर्ण गवाह शामिल हैं।  

फाइनल नोट में जिन अधिकारियों के नाम दर्ज हैं, उनके बयान जांच के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं और इन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब तक हरियाणा के आईजी शिबाश कविराज, पूर्व डीजीपी पीके अग्रवाल और मनोज यादव, आईपीएस अमिताभ ढिल्लों, आईपीएस संजय कुमार और डीजीपी शत्रुजीत कपूर सहित कई अन्य आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।  
फाइनल नोट में लगाए गए थे गंभीर आरोप

7 अक्टूबर की सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित आवास में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने अपनी सर्विस रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली थी। मौके से बरामद फाइनल नोट में उन्होंने 14 वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिवाद और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। घटना के अगले दिन आठ अक्टूबर को उनकी पत्नी और हरियाणा की आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार जापान दौरे से लौटीं।

उन्होंने आरोपितों की गिरफ्तारी और विभागीय कार्रवाई की मांग करते हुए पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया था। लगभग नौ दिनों तक चले गतिरोध के बाद पोस्टमार्टम हुआ और अंतिम संस्कार किया गया।
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