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सिपाही की ट्रेनिंग के बीच ही आई बड़ी खबर! 20 से ज्यादा जवान बन गए दारोगा, 2 को मिला ISRO का टिकट

Chikheang 3 hour(s) ago views 408
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही 20 से अधिक प्रशिक्षु सिपाही दारोगा बन गए। जब उन्हें दो स्टार की वर्दी मिली तो वे सिपाही की नौकरी छोड़कर चले गए। दो प्रशिक्षुओं को इसरो में जाने का मौका मिल गया। जबकि एक को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में तैनाती मिल गई।

ऐसे में प्रशिक्षण पूर्ण होने से पहले ही पांच हजार प्रशिक्षु सिपाहियों में से 33 को दूसरी जगह नौकरी मिल गई। वे सिपाही पद से इस्तीफा देकर चले गए। वहीं 27 प्रशिक्षु ऐसे हैं जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान ही 45 दिन से अधिक का अवकाश ले लिया। अब उन्हें उनकी तैनाती के जिले में भेज दिया गया है। अब वहां के अधिकारी निर्णय लेंगे कि उनका दोबारा से प्रशिक्षण कराया जाए या फिर उनके के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाए।

कड़ी मेहनत से तन पर खादी की वर्दी आने के बाद 33 प्रशिक्षु सिपाहियों की ऐसी किस्मत चमकी की, उन्हें कुछ दिनों बाद ही टू स्टार की वर्दी व दूसरे अच्छे विभागों में नौकरी मिल गई। मुरादाबाद जिले में पांच हजार प्रशिक्षु सिपाहियों का प्रशिक्षण चल रहा है। इसमें 33 को दूसरी नौकरी मिल चुकी है।

अभिषेक, तनु सिंह, भारत, राकेश कुमार, विष्णु सिंह, रचिन कुमार समेत 20 से अधिक प्रशिक्षुओं की अर्धसैनिक बल में दारोगा की नौकरी मिल गई। जबकि भारत चौधरी दिल्ली पुलिस में दारोगा बन गए। वहीं सहदेव हुड्डा और विशु चौधरी को सेमी कंडेक्टर इसरो में तैनाती मिल गई। जबकि मोनू शर्मा को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में नौकरी मिल गई। इसके बाद यह इस्तीफा देकर चले गए।

सभी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। जबकि 19 प्रशिक्षु सिपाही प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आए ही नहीं थे। साथ ही 27 प्रशिक्षु सिपाही ऐसे है जो 45 दिन से अधिक समय तक प्रशिक्षण के दौरान गैर हाजिर रहे हैं। अब इन्हें उनके तैनाती वाले जिले में वापस भेज दिया है। अब उनके जिले के अधिकारी यह निर्णय लेंगे की इनका प्रशिक्षण दोबारा कराया जाएगा फिर इन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा।
हर प्रशिक्षु पर रोज होते हैं 110 रुपये खर्च

मुरादाबाद समेत पूरे प्रदेश में चल रहे सिपाहियों के प्रशिक्षण में प्रत्येक प्रशिक्षु पर रोजाना करीब 110 रुपये खर्च होते हैं। यह खर्च 108 से 120 तक पहुंचता है। औसतन 110 रुपये रोजाना खर्च होते हैं। जिन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया है उन पर हुए खर्च की सरकार ने रिकवरी नहीं की है। उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बाद भेज दिया गया है।

  


कई प्रशिक्षु सिपाहियों के चयन के बाद दूसरी जगह नौकरी लग गई। ऐसे में वह सिपाही की नौकरी छोड़कर चले गए। कुछ प्रशिक्षण के दौरान 45 दिन से अधिक समय तक गैर हाजिर रहे हैं। ऐसे में उन्हें उनके तैनाती वाले जिले में भेज दिया गया है।

- सुभाषचंद्र गंगवार, नोडल अधिकारी प्रशिक्षण/एसपी लाइंस





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