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Shani Sade Sati: मेष राशि वालों को साढ़ेसाती से कब मिलेगी राहत? नोट करें वह तारीख जब पलटेगी आपकी किस्मत

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Shani Sade Sati: शनिदेव को कैसे प्रसन्न करें?



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व है। इस शास्त्र के माध्यम से व्यक्ति के भविष्य की पूरी जानकारी मिल जाती है। यदि कुंडली में किसी प्रकार का दोष लगा होता है, तो जातक को शुभ कामों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आसान शब्दों में कहें तो शुभ काम में सफलता नहीं मिलती है। वहीं, शुभ ग्रहों की कृपा-दृष्टि से जातक को जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है।

ज्योतिषियों की मानें तो व्यक्ति विशेष के कर्मों का फल की गणना शनिदेव करते हैं। अच्छे कर्म करने वालों को शनिदेव को मनोवांछित फल देते हैं। वहीं, बुरे कर्म करने वालों को शनिदेव पुण्य फल क्षय होने के बाद दंड देते हैं। इसके लिए व्यक्ति विशेष को जीवन में अच्छे कर्म करने की सलाह दी जाती है। वहीं, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान जातक को विषम परिस्थिति से गुजरना पड़ता है। आइए जानते हैं कि मेष राशि वालों को कब साढ़ेसाती से मुक्ति मिलेगी?

मेष राशि


  

मेष राशि के स्वामी ऊर्जा के कारक सूर्य देव हैं। इस राशि के आराध्य हनुमान जी हैं। इसके लिए मेष राशि के जातकों का शुभ रंग लाल होता है और शुभ अंक 1 और 8 होता है। मेष राशि वालों के लिए शुभ रत्न मूंगा होता है। आप ज्योतिष सलाह लेकर उचित समय में मूंगा धारण कर सकते हैं। वहीं, शुभ दिन मंगलवार होता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से मेष राशि के जातकों को करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलती है।
शनि गोचर 2027

न्याय के देवता शनिदेव ने 29 मार्च, 2025 को मीन राशि में गोचर किया था। इस राशि में शनिदेव ढाई साल तक रहेंगे। इसके बाद मीन राशि से निकलकर मेष राशि में गोचर करेंगे। शनिदेव 03 जून, 2027 को मेष राशि में गोचर करेंगे। इस दिन से वृषभ राशि के जातकों पर साढ़ेसाती शुरू होगी। वहीं, कूम्भ राशि के जातकों को साढ़ेसाती से मुक्ति मिलेगी। मेष राशि में शनिदेव ढाई साल तक रहेंगे। इसके बाद शनिदेव 31 मई 2032 को मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इस दिन से मेष राशि के जातकों को साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाएगी।
साढ़ेसाती उपाय

मेष राशि के जातक रोजाना पूजा के समय हनुमान चालीसा का पाठ करें। वहीं, मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी को एक चुटकी कुमकुम और लाल रंग के फल और मिष्ठान अर्पित करें। हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। अपनी कृपा साधक पर बरसाते हैं।
शनि देव के मंत्र

1. ऊँ शं शनैश्चाराय नमः।

2. ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

3. ॐ नीलाजंन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

4. अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।
दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।
गतं पापं गतं दु: खं गतं दारिद्रय मेव च।
आगता: सुख-संपत्ति पुण्योहं तव दर्शनात्।।

5. ऊँ श्रां श्रीं श्रूं शनैश्चाराय नमः।
ऊँ हलृशं शनिदेवाय नमः।
ऊँ एं हलृ श्रीं शनैश्चाराय नमः।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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