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Pradosh Vrat 2026: रवि प्रदोष व्रत पर बना खास संयोग, इस समय पूजा क्यों मानी जाती है असरदार

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Pradosh Vrat 2026: रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व है। यह पर्व हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि और संकटों से मुक्ति के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत का फल दिन अनुसार मिलता है। इसके लिए प्रदोष व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।

  

ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन माह के अंतिम प्रदोष व्रत पर न केवल मंगलकारी संयोग बन रहे हैं, बल्कि पूजा और साधना के लिए 48 मिनट का दुर्लभ योग भी हैं। इस दौरान महादेव और मां पार्वती की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होगी। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

प्रदोष व्रत के लाभ


प्रदोष व्रत का लाभ दिन अनुसार मिलता है। इस व्रत को करने से कुंडली में शुभ ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है। वहीं, अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त होता है। रवि प्रदोष व्रत करने से आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है। साथ ही करियर और कारोबार में भी मनमुताबिक सफलता मिलती है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में शिव शक्ति की विशेष पूजा की जाती है।
प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त

प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। यह समय बेहद पावन होता है। इस समय भगवान शिव की पूजा करने से साधक पर देवी मां पार्वती की विशेष कृपा बरसती है। उनकी कृपा से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
प्रदोष व्रत पूजा समय

  • फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत शनिवार 28 फरवरी को रात 08 बजकर 43 मिनट पर
  • फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समापन रविवार 01 मार्च को शाम 07 बजकर 09 मिनट पर


रवि प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा के लिए 48 मिनट का दुर्लभ संयोग है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल शाम 06 बजकर 21 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 09 मिनट तक है। इस दौरान शिवजी की भक्ति और साधना करने से सकल मनोरथ सिद्ध होंगे।
पंचांग

  • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 46 मिनट पर
  • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 21 मिनट पर
  • चन्द्रोदय- शाम 04 बजकर 16 मिनट पर
  • चंद्रास्त- सुबह 06 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 07 मिनट से 05 बजकर 57 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 16 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 43 मिनट तक
  • निशिता मुहूर्त - रात 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक


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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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