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1952 में बनीं ग्लोबल सेंसेशन, अंग्रेज ने चूमा हाथ तो लगा दी क्लास; राज कपूर संग चमका करियर, कहानी निम्मी की

Chikheang 3 hour(s) ago views 160
  

हॉलीवु़ड फिल्मों को ठुकराने वाली उस एक्ट्रेस की दास्तां



एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। एक बड़ा सा पर्दा और उस पर्दे पर खिलखिलाती और चहकती एक हसीना... नवाब बानो यानि निम्मी। वो जादुई आंखों वाली \“नवाब बानो\“, जिन्हें दुनियाभर में निम्मी के नाम से जानी गईं। राज कपूर की एक ऐसी खोज, जिसने पर्दे पर कदम रखते ही \“बरसात\“ ला दी थी। एक ऐसी स्टार, जिसके लिए फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स तक आपस में लड़ जाते थे कि \“निम्मी को फिल्म में मत मारो, जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।\“

इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि शौहरत के शिखर पर बैठी उस हसीना का स्टारडम क्या रहा होगा, लेकिन शोहरत के उस आसमान पर पहुंचने वाली निम्मी का अंत कैसे हुआ? क्यों उन्होंने अपने करियर के पीक पर इंडस्ट्री को छोड़ दिया? आइए जानते हैं \“The Unkissed Girl of India\“ की कहानी...
ऐसा था निम्मी का बचपन

हिंदी सिनेमा में निम्मी जब आईं तो ये वो दौर था जब सिनेमा नई राह पकड़ रहा था। हिंदी सिनेमा में निम्मी ही वो एक्ट्रेस थीं, जिन्होंने राज कपूर की पहली कलर फिल्म में काम किया था। एक्ट्रेस निम्मी का असली नाम नवाब बानो था। उनका जन्म 21 फरवरी, 1932 को आगरा में हुआ।

  

निम्मी के पिता अब्दुल हकीम आर्मी में एक कॉन्ट्रैक्टर थे, जबकि निम्मी की मां एक बड़ी सिंगर और एक्ट्रेस थीं। ऐसे में निम्मी को बचपन से सिनेमा की चाह तो मिली लेकिन मां का प्यार नहीं मिल पाया। निम्मी जब 11 साल की थीं तो मां का निधन हो गया। मां के जाने के बाद नानी ने निम्मी की परवरिश की।

निम्मी ने बचपन में खेतों में काम किया तो ऐसे में स्कूल नहीं जा पाईं। इसके बाद जब पार्टीशन के दौरान देश में दंगे हुए थो निम्मी नानी के साथ बंबई आकर रहने लगीं।
फिल्मों में ऐसे आईं निम्मी

दरअसल निम्मी जब हिंदी सिनेमा में आ रही थीं तो उस दौरान निम्मी की जान पहचान फिल्ममेकर महबूब खान थी और ये पहचान उनकी मां की वजह से थीं, क्योंकि वह एक एक्ट्रेस रह चुकी थीं। इसके बाद महबूब खान ने निम्मी को फिल्म अंदाज की शूटिंग देखने के लिए बुलाया।

  

निम्मी जब स्टूडियो आईं तो राज कपूर शूटिंग कर रहे थे। इसके बाद राज कपूर से निम्मी की मुलाकात हुई। राज कपूर उस दौरान अपनी फिल्म बरसात के लिए एक नया चेहरा ढूंढ़ रहे थे। आखिरकार निम्मी के रूप में उन्हें फिल्म की की सेकेंड लीड हीरोइन मिल गई। फिल्म में निम्मी प्रेमनाथ के अपोजिट नजर आईं। इस फिल्म से फिर निम्मी ने डेब्यू किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कई हिट फिल्मों में नजर आईं निम्मी

इस फिल्म के बाद निम्मी को बड़ी फिल्मों के ऑफर्स मिलने लगे। निम्मी बेहद क्यूट और खूबसूरत थीं तो ऐसे में उन्हें फिल्मों में अच्छे किरदार मिल रहे थे। निम्मी के पास फिल्मों की कमी नहीं थी। हालांकि निम्मी को सेकेंड लीड रोल वाले ऑफर ज्यादा मिल रहे थे।

  

निम्मी को लगा कि अगर वो फिल्मों में सेकेंड लीड करेंगी, तो शायद ज्यादा करियर अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कई फिल्मों के ऑफर्स इसी के चलते ठुकरा दिए। आखिरकार निम्मी ने फिर पैसों के चलते कुछ फिल्मों को हां कर दिया और फिर उन्हें कुछ लीड हीरोइन वाल फिल्में भी मिलीं। \“आन\“, \“दीदार\“, \“सज़ा\“, \“उड़न खटोला\“, \“भाई-भाई\“ और \“कुंदन समेत वो कई फिल्मों में नजर आईं।
\“द अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया\“ का मिला खिताब

यह किस्सा बहुत मशहूर है। निम्मी को \“The Unkissed Girl\“ का खिताब लंदन में मिला था। 1952 में जब उनकी फिल्म \“आन\“ का प्रीमियर लंदन में हुआ, तो हॉलीवुड के बड़े सितारे वहां मौजूद थे।

  

इस फिल्म का प्रीमियर लंदन के रियाल्टो थिएटर में हुआ था जहां कुछ विदेशी फिल्ममेकर्स और कलाकार भी आए थे। उस दौर के मशहूर एक्टर एरोल फ्लिन ने उनके हाथ को चूमने की कोशिश की, लेकिन निम्मी ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और कहा, “मैं एक हिंदुस्तानी लड़की हूं, हम ऐसे नहीं करते।“

  

अगले दिन लंदन के अखबारों में हेडलाइन थी “The Unkissed Girl of India“। ये किस्सा भारत में भी काफी पॉपुलर हुआ। कहा जाता है कि, इसी फिल्म के प्रीमियर पर कुछ फिल्ममेकर्स ने निम्मी को हॉलीवुड फिल्म भी ऑफर की थी लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया था। दरअसल, हॉलीवुड फिल्मों में लवमेकिंग सींस होते हैं, जिन्हें करने में निम्मी असहज थीं और इसीलिए उन्होंने ये ऑफर्स ठुकराए थे।
ऐसे बर्बाद हुआ निम्मी का करियर

कहा जाता है कि, उस दौर में निम्मी इतनी पॉपुलर थीं कि फिल्म \“आन\“ में उनके किरदार की मौत के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स ने शिकायत की कि जनता निम्मी को मरते नहीं देख सकती। तब फिल्म में एक नया ड्रीम सीक्वेंस जोड़ा गया ताकि निम्मी पर्दे पर ज्यादा देर दिखें। राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार जैसे दिग्गज निम्मी के साथ काम करने के लिए राह तकते थे।

  

साल 1963 की फिल्म \“मेरे महबूब\“ में निम्मी को सेकेंड लीड किरदार चाहिए था, क्योंकि वह राजेंद्र कुमार की बहन का किरदार निभाना चाहती थीं। हालांकि डायरेक्टर हरमन सिंह रवैल ने निम्मी को लीड रोल के लिए अप्रोच किया था पर निम्मी नहीं मानी। आखिरकार निम्मी सेकेंड लीड में आईं और मुख्य किरदार साधना को मिला और इस फिल्म से साधना का करियर चमक गया और निम्मी को फिर सेकेंड लीड रोल ज्यादा मिलने लगे।

  

निम्मी के करियर की सबसे बड़ी गलती \“पाकीज़ा\“ को भी माना जाता है। कहा जाता है कि, शुरुआत में उन्हें लीड रोल ऑफर हुआ था, लेकिन फिल्म बनने में इतना वक्त लगा कि अंत में मीना कुमारी लीड बनीं।
शादी के बाद फिर छोड़ दिया बॉलीवुड

कहा जाता है कि निम्मी एक वक्त दिलीप कुमार को काफी पसंद करती थीं। हालांकि निम्मी का नाम यूं तो कई लोगों के साथ जुड़ा, लेकिन उनका दिल आया मशहूर स्क्रीनराइटर एस. अली रज़ा पर। कहा जाता है कि फिल्म \“आन\“ की शूटिंग के दौरान दोनों में प्यार हुआ और 1960 के दशक में उन्होंने शादी कर ली।

  

अली रज़ा ने ही निम्मी की फिल्म \“आन\“ और \“अंदाज\“ जैसी फिल्में लिखी थीं। दोनों की कोई संतान नहीं थी, लेकिन उनका रिश्ता अली रज़ा की मौत तक अटूट रहा। साल 2007 में उनके पति का निधन हो गया। हालांकि निम्मी ने अपनी बहन की बेटे को गोद जरूर लिया था।

निम्मी (Actress Nimmi) का अंतिम समय गुमनामी में नहीं, बल्कि सुकून में बीता, लेकिन वह अपने पति की मौत के बाद काफी अकेली हो गई थीं। 25 मार्च 2020 को 88 वर्ष की उम्र में मुंबई में उनका निधन हुआ। अपने करियर में निम्मी ने कई फिल्में कीं और खूब नाम कमाया और हिंदी सिनेमा को कई यादगार तोहफें देकर गईं।
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