रजौली विधानसभा से लोजपा (रामविलास) के विधायक विमल राजवंशी। फोटो जागरण
संवाद सहयोगी, रजौली (नवादा)। रजौली विधानसभा क्षेत्र के रजौली थाना और सिरदला थाना के सीमावर्ती वन क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर झारखंड राज्य के विभिन्न इलाकों से आए अनेकों बाहरी लोगों के बसावट का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर मंगलवार को रजौली विधानसभा से लोजपा (रामविलास) के विधायक विमल राजवंशी ने सदन में सवाल उठाते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए आरोप लगाया कि उक्त वनभूमि पर रह रहे लोगों का बिहार सरकार के पास कोई आधिकारिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है।
आखिर ये लोग किस उद्देश्य से यहां आए, इनका स्थायी या अस्थायी निवास किस आधार पर बना। इतने घने जंगल में ये किस प्रकार रह रहे हैं। इन सभी बिंदुओं पर अब तक कोई ठोस जांच नहीं कराई गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन की कथित मिलीभगत से वन विभाग की भूमि पर बसे इन बाहरी लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण का लाभ उपलब्ध करा दिया गया।
यदि यह आरोप सही है तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल है।
विधायक विमल राजवंशी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की। यह भी कहा कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपने स्वार्थवश इन लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने का काम किया, ताकि पंचायत चुनाव में उन्हें वोट का लाभ मिल सके।
उल्लेखनीय है कि इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर दैनिक जागरण कई बार खबर प्रकाशित करता रहा है। अब जब मामला विधानसभा में गूंजा है, तो निगाहें स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं।
अब देखना यह होगा कि सदन में उठी आवाज के बाद प्रशासन जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या फिर मामला पूर्व की तरह फाइलों में ही सिमट कर रह जाता है। |