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AMR का प्रहार: बिना डॉक्टरी सलाह एंटीबायोटिक लेना खतरनाक, 2050 तक हर साल जा सकती है 1 करोड़ जान

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मरीज को परामर्श देते यूरोलॉजिस्‍ट डॉ. हरप्रीत सिंह।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। दैनिक जागरण के देशव्यापी अभियान ‘एएमआर (एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस) का प्रहार: एंटीबायोटिक, लापरवाही नहीं चलेगी’ के तहत मंगलवार को जमशेदपुर के बाराद्वारी स्थित यूरोविटा यूरोलॉजी अस्पताल में एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।   इस कार्यक्रम में यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरप्रीत सिंह ने एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की और मरीजों को इसके प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। उन्‍होंने कहा कि‍ दैनिक जागरण का यह अभियान समाज के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। मैं स्वयं इस मुहीम के साथ हू और हर मरीज को इसके प्रति जागरूक करूँगा।

वायरल बुखार में न लें एंटीबायोटिक


डॉ. सिंह ने एक बड़े भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि सर्दी, जुकाम और सामान्य वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं की कोई भूमिका नहीं होती। इसके बावजूद, लोग बिना चिकित्सकीय परामर्श के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर सेवन करने लगते हैं।

यह आदत शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचाती है और भविष्य में गंभीर बीमारियों के समय दवा का असर खत्म कर देती है।
सही डोज और पूरा कोर्स है अनिवार्य

कार्यक्रम के दौरान डॉ. हरप्रीत ने एंटीबायोटिक के उपयोग के तीन सुनहरे नियम बताए:

  •     सही मरीज: दवा केवल उसी संक्रमण के लिए लें जिसके लिए वह बनी है।
  •     सही मात्रा: डॉक्टर द्वारा बताई गई सटीक डोज ही लें।
  •     पूरी अवधि: अक्सर लोग दो दिन में आराम मिलने पर दवा छोड़ देते हैं। इससे जीवाणु शरीर में बचे रह जाते हैं और वे दवा के प्रति प्रतिरोधी (Resistant) बन जाते हैं।


2050 तक का भयावह आंकड़ा


डॉ. सिंह ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में हर साल दुनिया भर में लगभग 12 से 13 लाख लोगों की मौत इसलिए हो रही है क्योंकि उन पर दवाएं बेअसर हो चुकी हैं। यदि एंटीबायोटिक का अंधाधुंध इस्तेमाल नहीं रुका, तो वर्ष 2050 तक यह आंकड़ा 1 करोड़ मौतें प्रतिवर्ष तक पहुंच सकता है।

  
दवा दुकानदारों से अपील उन्होंने शहर के दवा दुकानदारों से भी आग्रह किया कि वे बिना वैध पर्चे के ग्राहकों को एंटीबायोटिक दवाएं न बेचें। यह छोटी सी व्यवसायिक सावधानी समाज को एक बड़े स्वास्थ्य संकट से बचा सकती है।


यदि एंटीबायोटिक बेअसर होती गईं तो सामान्य सर्जरी, प्रसव और छोटे संक्रमण का इलाज भी कठिन हो जाएगा। किडनी, फेफड़े और अन्य अंगों के संक्रमण का उपचार लंबा और महंगा होगा। अस्पतालों में भर्ती की अवधि बढ़ेगी और मृत्यु दर में भी इजाफा हो सकता है।
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डॉ. हरप्रीत सिंह, यूरोलॉजिस्‍ट
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