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जबलपुर में EE बर्खास्त, फर्जी दस्तावेज से निजी कंपनी को दिलाया था अनुचित लाभ, बिजली कंपनी पर 8.50 करोड़ रु. हर्जाना

deltin33 2025-12-18 20:37:22 views 600
  

ईई को किया बर्खास्त (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने भ्रष्टाचार से जुड़े एक गंभीर मामले में कार्यपालन अभियंता मुकेश सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। कंपनी का आरोप है कि मुकेश सिंह ने मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए, जिनके आधार पर हाई कोर्ट से कंपनी के खिलाफ 8.50 करोड़ रुपये का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का आदेश पारित हुआ। इस भारी वित्तीय क्षति के लिए विद्युत कंपनी ने सीधे तौर पर कार्यपालन अभियंता को जिम्मेदार ठहराया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
जांच में असहयोग, बार-बार नोटिस के बाद कार्रवाई

मंगलवार को जारी आदेश के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने जांच प्रक्रिया में लगातार असहयोग किया और कार्रवाई को टालने का प्रयास किया। बताया गया कि 18 वर्षों की सेवा अवधि में मुकेश सिंह को 20 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे, जबकि चार मामलों में उनके खिलाफ आरोप पत्र भी जारी हो चुके थे।
कूटरचना से बदली तारीख, कंपनी को पहुंचा नुकसान

मुकेश सिंह 6 सितंबर 2018 से 14 जनवरी 2021 तक संचालन एवं संधारण संभाग, शहडोल में पदस्थ थे। इस दौरान उन्होंने अल्ट्राटेक सीमेंट (विचारपुर कोल माइंस) के 33 केवी उच्चदाब विद्युत कनेक्शन के हैंडओवर की वास्तविक तिथि 5 मार्च 2019 को बदलकर कूटरचित रूप से 1 मार्च 2019 दर्शा दिया। इसका उद्देश्य उपभोक्ता को विद्युत शुल्क में छूट का पात्र बनाना था, जबकि वास्तविक तिथि छूट अवधि के बाद की थी।

इतना ही नहीं, कार्य पूर्णता प्रतिवेदन को प्रमाणित कराने के लिए अधीक्षण अभियंता को भी भ्रामक जानकारी दी गई। जांच में सामने आया कि उपभोक्ता को लाभ पहुंचाने के लिए कार्य पूर्णता और हैंडओवर की तिथियों में जानबूझकर हेरफेर की गई।

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हाई कोर्ट के आदेश से खुला मामला

इन कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर हाई कोर्ट ने 6 मई 2024 को अल्ट्राटेक सीमेंट के पक्ष में 8.50 करोड़ रुपये का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का आदेश दिया था। इसके बाद 16 दिसंबर 2024 को मुकेश सिंह को निलंबित कर दिया गया।

विभागीय जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि दो अलग-अलग कार्यपूर्णता और हैंडओवर प्रतिवेदन स्वयं मुकेश सिंह द्वारा जारी किए गए थे, जिनमें 1 मार्च 2019 का दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाया गया। दोनों दस्तावेजों पर उनके ही हस्ताक्षर थे।

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प्रबंध संचालक का सख्त फैसला

प्रबंध संचालक अनय द्विवेदी ने मुकेश सिंह का अभ्यावेदन खारिज करते हुए मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 10 के तहत तत्काल प्रभाव से उन्हें कंपनी सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए हैं। इस कार्रवाई को बिजली कंपनी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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