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टेक की दुनिया में नारी शक्ति का परचम, AI स्टार्टअप से बनीं Icon

deltin55 1 hour(s) ago views 1


यह नई पीढ़ी की ये महिलाएं मानो अपने हुनर से भविष्य की रेखाएं खुद खींच रही हैं। कभी लैपटॉप पर कोड बुनते हुए, कभी असफलताओं से नई दिशा देखते हुए। इनके स्टार्टअप सिर्फ कंपनियां नहीं, बल्कि वो प्रयोगशालाएं हैं जहां हर दिन कोई नया आइडिया उड़ान भरता है। चुनौतियां इनके लिए पहाड़ नहीं, बल्कि वो सीढ़ियां हैं जिन पर चढ़कर ये AI की दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बना रही हैं।अब उम्र, टेक या परिवार किसी भी महिला के आगे बाधा नहीं है। दिल्ली-NCR में कई महिलाएं ऐसी AI कंपनियां खड़ी कर रही है, जो इनोवेशन और डीप-टेक का नया चेहरा बन चुकी हैं। इनके लिए असफलताएं रुकावट नहीं, बल्कि बिजनेस मॉडल को सुधारने और पुरानी गलतियों से सीखने का मौका बन गई है। करीब दस साल पहले, दीप्ति प्रसाद Genpact में कंसल्टिंग करती थीं और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई पूरी कर चुकी थी। शादी और इवेंट फोटोग्राफरों के साथ समय बिताने के अनुभव ने उन्हें एक डिस्कवरी प्लेटफॉर्म बनाने का आइडिया दिया। हालांकि यह वेंचर प्रॉफिटेबल नहीं हुआ, लेकिन इससे उन्हें फोटोग्राफी मार्केट की गहरी समझ मिली। 2018 में, उन्होंने अपने पति संजय वर्णवाल के साथ Spyne.ai शुरू किया। शुरू में कंपनी ई-कॉमर्स फूड, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल में इमेज ऑटोनेशन पर काम करती थी, लेकिन अब पूरी तरह ऑटोमोबाइल सेक्टर पर फोकस है। Spyne.ai छोटे कार डीलरों को स्मार्टफोन से फोटो लेकर हाई-क्वॉलिटी स्टूडियो इमेज बनाने की सुविधा देती है। आज इसका 70% रेवेन्यू विदेशों से आता है और टीम 200 से ज्यादा कर्मचारियों की है।अनुजा धवन ने करियर की शुरुआत कंसल्टिंग फर्म KPMG से की। इसके बाद वे एक स्टार्टअप में गई और फिर पांच साल SaaS कंपनी Freshworks में बिताए। महामारी के दौरान 2021 में ऑनलाइन एजुकेशन में आया बड़ा गैप उन्हें परेशान करने लगा। अनुजा कहती हैं कि एजुकेशन ऑनलाइन दी जा रही थी लेकिन कंटेंट इग्लिंश में था। भारत के 90 फीसदी लोग अंग्रेजी नहीं बोलते। दूसरी ओर, सीखने का कंटेंट तेजी से विडियो-फर्स्ट होता जा रहा था। इसी सोच से Dubverse.ai का आइडिया आया। अगर अच्छा कंटेंट अंग्रेजी में मौजूद है तो AI की मदद से उसे कई भारतीय और इंटरनैशनल लैंग्वेजों में क्यों न बदला जाए। Dubverse.ai में यूजर विडियो अपलोड कर लैंग्वेज चुनता है और कुछ ही मिनटों में डब किया हुआ विडियो आपके सामने होता है।नमिता शर्मा ने 2024 में Purpleant Technologies शुरू की। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में पली-बढ़ी, IT पढ़ाई और IIM, कलकता से MBA किया। गुरुग्राम लौटकर उन्होंने Bot Wot.oi विकसित किया, जो वट्‌सऐप से कॉल तक सभी कॉन्टेक्ट पॉइंट्स ऑटोमेट करता है। Nita Kitchenware जैसे क्लाइंट इसे Cash-on-Delivery ऑर्डर कन्फर्म करने के लिए इस्तेमाल करते है। AI मैसेज भेजता, जवाब लेता है और जल्द वॉइस कॉल भी संभालेगा। कंपनी अब वॉइस AI लॉन्च करने जा रही है और आगे ऐसे रोबॉट बनाने पर काम करेगी जो लोगों के लिए दुनिया में काम कर सकें।Tracxn की को-फाउंडर नेहा सिंह कहती हैं कि दिल्ली-NCR की महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे स्टार्टअप्स में 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हो चुका है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। ये चैटबॉट, मार्केटिंग टेक, साइबर सिक्योरिटी और कस्टमर सपोर्ट जैसी कैटिगरी में तेजी से उभर रहे हैं।तृप्ति बंसल ने आइडिया सेल्यूलर, SBI कार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस और Amazon में एक दशक से ज्यादा समय तक काम किया। Amazon में AI-ML आधारित मार्केटिंग प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए उन्हें टेक्नॉलजी के छोटे-छोटे फैसलों से बड़े प्रभाव डालने का अनुभव मिला। इसी प्रेरणा से उन्होंने अपने पहले वेंचर को बंद कर Policyindex.ai शुरू किया। यह प्लैटफॉर्म गजट, सर्कुलर, ड्राफ्ट बिल, सरकारी आदेश और टेंडर को एक ही इंटरफेस में लाता है। यूजर इलेक्ट्रिक वाहन नियम या डेटा प्रोटेक्शन नॉर्म्स जैसे मामलों को ट्रैक कर सकते हैं और AI-जनरेटेड सार पढ़ सकते है। तृप्ति का लक्ष्य इसे सभी भारतीय भाषाओं में डिफॉल्ट सरकारी डॉक्यूमेंट प्लैटफॉर्म बनाना है।रिमझिम अग्रवाल और लेना इमैनुएल की BrainSightAI डीप-टेक में हेल्थकेयर चुनौतियों को हल कर रही है। दोनों बेगलुरु में रहती हैं, लेकिन उनका रिसर्च सेंटर दिल्ली-NCR में है। रिमझिम NIMHANS से मशीन लर्निंग और न्यूरोसांइस में PhD हैं, जबकि लेना NIT कालीकट से BTech और ISB मोहाली से MBA कर चुकी हैं। दोनों की मुलाकात लदन के 』त्रप्रेन्योर फर्स्ट✩्रोग्राम में हुई और हेल्थकेयर में समान रुचि ने उन्हें साथ काम करने के लिए प्रेरित किया। BrainSightAI ने 〯माग का गूगल मैप बनाया है, यानी रेस्टिंग स्टेट फंक्शनल MRI पर आधारित एडवांस्ड बेन मैपिंग सिस्टम। पारंपरिक MRI में मरीजों को जटिल टास्क करने पड़ते हैं, लेकिन BrainSightAI में मरीज केवल सात मिनट शांत लेटते हैं। सिस्टम स्ट्रक्चरल, फंक्शनल और ट्रैक्टोग्राफी डेटा प्रोसेस कर दिमाग के मुख्य नेटवर्क दिखाता है। यह आउटपुट न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम में फिट होता है और डॉक्टर सर्जरी के दौरान रियल-टाइम फंक्शनल जानकारी देख सकते हैं। टीम में लगभग 50 एक्सपर्ट्स हैं और तकनीक 40+ अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही है।
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