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पूर्वोत्तर रेलवे में अब इंटरसिटी कहलाएंगी डेमू और मेमू ट्रेनें, आने वाले दिनों में होगा एक और बदलाव

Chikheang 2025-12-18 14:06:33 views 1242
  

डीजल इंजन से डेमू और इलेक्ट्रिक से चलती हैं मेमू ट्रेनें। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे में चल रही डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (डेमू) और मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (मेमू) ट्रेन का नाम बदल जाएगा। अब यह ट्रेनें अब इंटरसिटी कहलाएंगी, जो एक से दूसरे शहर को जोड़ती हैं और सुबह से चलकर शाम को वापस भी आ जाती हैं। रेलवे प्रशासन ने नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही इसपर अंतिम मुहर लग जाएगी।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जानकारों का कहना है कि पूर्वोत्तर रेलवे में गोरखपुर-नौतनवा समेत 13 जोड़ी डेमू और भटनी-अयोध्या समेत कुल 18 जोड़ी मेमू ट्रेनें चलती हैं। इन ट्रेनों को लेकर यात्रियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती हैं। जबकि, यह ट्रेनें भी इंटरसिटी की तरह एक-दूसरे शहर या कस्बा को जोड़ती हैं। ऐसे में रेलवे प्रशासन ने इन ट्रेनों को भी इंटरसिटी बनाने का निर्णय लिया है।

ताकि, लोकल रूटों पर चलने वाले यात्रियों को सहूलियत मिल सके। फिलहाल, गोरखपुर-लखनऊ, गोरखपुर-बनारस और गोरखपुर-छपरा समेत पूर्वोत्तर रेलवे में दर्जन भर इंटरसिटी ट्रेनों का संचालन होता है। डेमू और मेमू का नाम भी इंटरसिटी होने के बाद यह संख्या और बढ़ जाएगी। दरअसल, पूर्वोत्तर रेलवे में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण होने के बाद लोकल रूटों पर पैसेंजर और डेमू की जगह अब मेमू ट्रेनें ही चलेंगी, जो इंटरसिटी कहलाएंगी।

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पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने रेलवे बोर्ड से मेमू ट्रेनों की मांग की है। नई मेमू ट्रेनों को गोरखपुर-देवरिया-भटनी-छपरा, गोरखपुर- बस्ती-गोंडा और गोरखपुर- कप्तानगंज-थावे रूट, गोरखपुर- आनंदनगर-नौतनवां, गोरखपुर- आनंदनगर-बढऩी आदि लोकल रूटों पर पर्याप्त संख्या में मेमू ट्रेनें ही चलाई जाएंगी। औड़िहार शेड और यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में इनकी ओवरहालिंग होती है।

(एलएचबी) कोच ही लग रहे हैं।

  • बढ़ेगी रफ्तार, होगी समय की बचत
  • मेमू ट्रेनें 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं।
  • मेमू ट्रेन के आगे और पीछे दोनों तरफ इंजन होता है।
  • स्टेशनों पर नहीं बदलना पड़ता है ट्रेन का इंजन।
  • चलने के साथ ही रफ्तार पकड़ लेती है यह ट्रेन।
  • समय की होती है बचत, लाइन की बढ़ती है क्षमता।
  • डीजल की बचत के साथ संरक्षित होता है पर्यावरण।
  • सप्ताह में एक दिन होती है धुलाई-सफाई व मरम्मत।
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