कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज़ और शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कैंपस के सीनेट हॉल में आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों ने भारतीय भाषा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

संगोष्ठी का उद्घाटन अतिथियों ने दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की आराधना के साथ किया। स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज़ के निदेशक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की भाषायी विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
रांची विश्वविद्यालय के प्रो. (डॉ.) जंग बहादुर पाण्डेय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और भारतीय भाषाएं हमारी पहचान हैं। उन्होंने आज के युग में कंप्यूटर ज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की समझ को समय की मांग बताया। प्रो. पाण्डेय ने गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन में ज्ञान को सर्वोच्च महत्व दिया गया है, क्योंकि ज्ञान ही व्यक्ति को सही दिशा और उद्देश्य प्रदान करता है।
हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रो. एस. अरुल्मोजी ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय भाषाओं के लिए एक चुनौती होने के साथ-साथ असीम संभावनाओं का द्वार भी खोलती है। उन्होंने जोर दिया कि इसका उपयोग भाषायी विविधता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए।
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