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दोपहर में दादी के साथ जाने की जिद, फिर दीवाली की रात बुझ गए घर के दो दीये

cy520520 2025-10-22 16:37:17 views 1217
  



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। कभी-कभी जिद भी जिंदगी छीन लेती है। दीपावली के दिन ऐसा ही एक मंजर शहर के मुहल्ला सूरजनगर में देखने को मिला, जब खेत पर चारा लेने निकली दादी-पौत्री की जोड़ी हमेशा के लिए बिछड़ गई। दोपहर एक बजे हुए हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल दीं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

65 वर्षीय सुनीता देवी अपनी पौत्री एंजल से बेहद लगाव रखती थीं। घर के बाकी बच्चों के बीच एंजल उनकी आंखों का तारा थी। जब भी स्कूल से लौटती, सबसे पहले दादी के पास जाती। रात में मां-बाप से अलग, हमेशा दादी के साथ ही सोती थी। दोनों के बीच वह अपनापन था, जो हर उम्र की दूरी मिटा देता था। सोमवार को दीपावली थी। घर में दीयों की तैयारी चल रही थी।
दादी के साथ जाने की जिद में आड़ी बच्ची

दादी सुनीता खेत पर पशुओं के लिए चारा लेने निकलीं तो एंजल भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। स्वजन ने कई बार रोका, मगर उसने कहा कि आज दीपावली है, मैं दादी के साथ जाऊंगी तो वो जल्दी लौट आएंगी… फिर पटाखे जलाएंगे यह मासूम जिद ही उसकी आखिरी बात बन गई। कुछ ही देर बाद खेत से हादसे की सूचना आई। जब तक लोग वहां पहुंचे, तब तक दादी-पौत्री दोनों की सांसें थम चुकी थीं। बताया गया कि खेत पर जाते समय ही हादसा होने पर दोनों की मौत हो गई।

घर में जहां कुछ घंटे बाद दीये जलने थे, वहां अब सिर्फ रुलाई थी। पिता अनुज की आंखों में वो लम्हा बार-बार लौट आता है जब उन्होंने बेटी से कहा था कि ठीक है, जल्दी आना। पर एंजल कभी नहीं लौटी। जीवन भर के लिए वह पिता से जुदा हो गई। मुहल्ले के लोग बताते हैं कि दादी-पोती की जोड़ी हर समय साथ दिखती थी। पूजा में, मेले में, यहां तक कि नींद में भी एक-दूसरे से अलग नहीं होती थीं।

दीपावली की रात घर की दीवारों पर लटकी झालरें अब भी जल रही हैं, मगर उस घर की रोशनी बुझ चुकी है, जिस खेत से हर साल हरियाली लौटती थी, वहीं से इस बार दो लाशें लौटीं। एक दादी के स्नेह की, दूसरी पोती की मासूम हंसी की। दीपावली पर दो दीये नहीं जले। एक दादी-पोती की जोड़ी चली गई,पर पीछे छोड़ गई अनकही ममता की कहानी। इस हादसे से पूरे मुहल्ले में मातम है।
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