search

7 साल का वकालत अनुभव रखने वाले न्यायिक अधिकारी जिला जज की सीधी भर्ती के पात्र, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

deltin33 2025-10-10 07:06:24 views 1249
  

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला। (फाइल फोटो)



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिए महत्वपूर्ण फैसले में अधीनस्थ न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीजन, मुंसिफ मजिस्ट्रेट आदि) के न्यायिक अधिकारियों के लिए सीधी भर्ती से जिला जज बनने का रास्ता खोल दिया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय में, पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से कहा है कि जिन अधीनस्थ न्यायिक सेवा के अधिकारियों के पास न्यायिक अधिकारी और वकील के रूप में सात वर्ष या उससे अधिक का अनुभव है, वे जिला जज की सीधी भर्ती के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस निर्णय के साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज और अतिरिक्त जिला जज की नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु भी निर्धारित की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की तिथि पर आवेदक की आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए। यह निर्णय उन न्यायिक अधिकारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्होंने नौकरी ज्वाइन करने से पहले वकालत की है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाए महत्वपूर्ण फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दो महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं, जिनमें से एक जस्टिस बीआर गवई ने लिखा है। अन्य न्यायाधीशों में जस्टिस एमएम सुंद्रेश, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस के. विनोद चंद्रन शामिल हैं। संविधान पीठ ने चार कानूनी सवालों का उत्तर देते हुए कहा है कि जिन न्यायिक अधिकारियों के पास सात साल का वकालत का अनुभव है, वे सीधी भर्ती में जिला जज बनने के लिए पात्र हैं। इस फैसले का दूरगामी प्रभाव होगा, क्योंकि यह अधीनस्थ न्यायिक सेवा के मेधावी न्यायिक अधिकारियों को सीधे जिला जज बनने का अवसर प्रदान करता है।
कब से लागू होगा यह आदेश?

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निर्णय आदेश की तिथि से लागू होगा। संविधान पीठ ने यह भी कहा है कि जिला जज या अतिरिक्त जिला जज की नियुक्ति के लिए आवेदन की योग्यता उस समय देखी जाएगी जब आवेदक आवेदन कर रहा हो। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा है कि अनुच्छेद 233 (2) के तहत पहले से न्यायिक सेवा में कार्यरत व्यक्तियों के लिए कोई विशेष योग्यता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा पहले का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के निर्णय को पलटते हुए कहा है कि जिन नियमों को राज्य सरकारों ने हाई कोर्टों से परामर्श करके बनाया था, वे इस नए निर्णय के अनुरूप नहीं हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वे तीन महीने के भीतर इस फैसले के अनुसार नए नियम बनाएं। इस निर्णय के पीछे का मुख्य मुद्दा यह था कि क्या न्यायिक अधिकारियों को वकीलों के कोटे से जिला जज की नियुक्ति में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल का सकारात्मक उत्तर दिया है, जिससे न्यायिक अधिकारियों को समान अवसर प्रदान किया गया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, अब न्यायिक अधिकारियों के लिए जिला जज बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जो कि उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।

यह निर्णय न केवल न्यायिक अधिकारियों के लिए, बल्कि न्यायिक प्रणाली के लिए भी एक सकारात्मक कदम है। सुप्रीम कोर्ट की इस संविधान पीठ ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी न्यायिक अधिकारियों को समान अवसर मिले और उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें उचित स्थान मिले। यह निर्णय न्यायिक सेवा में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में न्यायिक प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएगा।
इन सवालों पर कोर्ट ने किया विचार

सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 12 अगस्त 2025 को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को कानूनी सवाल विचार के लिए भेजे थे। कोर्ट को चार सवाल विचार के लिए भेजे गए थे।

पहला- कि क्या जिस न्यायिक अधिकारी के पास अधीनस्थ न्यायिक सेवा में नियुक्ति पाने से पहले सात साल का वकालत का अनुभव है, वो न्यायिक अधिकारी, वकीलों वाले कोटे से अतिरिक्त जिला जज नियुक्ति होने का पात्र है।

दूसरा-जिला जज के पद पर नियुक्ति के लिए जो पात्रता देखी जाएगी वह पात्रता नियुक्ति के समय देखी जाएगी या फिर आवेदन के समय होनी चाहिए।

तीसरा- क्या जो व्यक्ति पहले से संविधान के अनुच्छेद 233 (2) के तहत केंद्र या राज्य की न्यायिक सेवा में है उसके लिए जिला जज बनने के लिए कोई योग्यता तय है।
और चौथा-सवाल था कि जो व्यक्ति सात साल से सिविल जज है या फिर वकील और सिविल जज दोनों मिला कर वह सात साल या उससे ज्यादा का अनुभव रखता है तो क्या वह अनुच्छेद 233 के तहत जिला जज पद पर नियुक्ति का पात्र होगा।

इस मामले में मुख्य मुद्दा जिला जज की सीधी भर्ती में वकीलों के कोटे में न्यायिक अधिकारियों के भी चयन प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर था।

यह भी पढ़ें: \“बच्चों को युवा उम्र में दे देनी चाहिए यौन शिक्षा\“, आरोपी किशोर को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4510K

Credits

administrator

Credits
459709

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com