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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ई-आफिस व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने साप्ताहिक समीक्षा बैठक में सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जो कर्मचारी पूरे माह में एक बार भी ई-ऑफिस पर लागिन नहीं करेंगे, उनका वेतन रोका जाए।
विद्यालयों में बालिका शौचालय, आंगनवाड़ी भर्ती और पंचायत उत्सव भवन निर्माण जैसे प्राथमिकता वाले कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने के भी निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने बुधवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक में कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के भीतर ही सभी तहसील एवं ब्लाक मुख्यालयों पर ई-ऑफिस अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
आवश्यक आधारभूत संरचना, प्रशिक्षण और फाइल संचालन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पांच मार्च तक सभी विद्यालयों में बालिका शौचालय बनाने के लिए कहा है।
इसके साथ ही सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त, राजकीय एवं परिषदीय विद्यालयों में बालिका शौचालय सुनिश्चित कर इसकी सूचना पोर्टल पर अपलोड की जाए।
मुख्य सचिव ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया समय-सारिणी के अनुरूप पूरी करने के लिए कहा है। जिन जिलों में प्रगति धीमी है, वहां विशेष प्रयास किया जाए।
प्रदेश के सभी मंडलों में एक-एक स्पोर्ट्स कालेज स्थापित करने की योजना पर भी जोर दिया गया। अयोध्या, बरेली, आगरा, मीरजापुर, देवीपाटन, झांसी, बस्ती, मुरादाबाद, मेरठ और अलीगढ़ मंडलों में 50 एकड़ भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इन स्पोर्ट्स कालेजों को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित कर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से संबद्ध किया जाएगा।
पंचायत उत्सव भवन निर्माण में भी तेजी लाने, लंबित निविदा प्रक्रियाएं शीघ्र पूर्ण कर कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति से अवगत कराया, जिस पर मुख्य सचिव ने समयबद्ध और परिणाम देने वाली कार्यवाही करने पर बल दिया।  |
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