सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवादाता, आगरा। फाइनेंस कंपनी की बकाएदारी की वसूली के लिए पुलिस ने सारी हदें पार कर दीं। घर से उठाकर जेसीबी मालिक को 12 घंटे थाने में अवैध हिरासत में रखा। एजेंट के माध्यम से 25 हजार रुपये वसूलने के बाद उसे छोड़ा।
पीड़ित ने गुरुवार को डीसीपी सिटी से मिलकर शिकायत की। इसके बाद डीसीपी ने आरोपित सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया। मामले की जांच एसीपी लोहामंडी को सौंप दी है।
शाहगंज के रहने वाले रईस खां ने कुछ वर्ष पहले जेसीबी खरीदी थी। इस पर फाइनेंस लिया था। पीड़त का आरोप है कि उन पर फाइनेंस की कुछ किस्त बकाया थीं। इसको लेकर फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी उन्हें परेशान कर रहे थे।
पीड़ित ने दो फरवरी को पुलिस से फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों द्वारा अभद्रता और धमकी दिए जाने की शिकायत की थी। पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
आरोप हैं कि सात फरवरी को दोपहर शाहगंज थाने का सिपाही सनी एक दारोगा के साथ उनके घर पहुंचा और उन्हें थाने ले गया। यहां बिना किसी शिकायत के 12 घंटे तक हिरासत में रखा गया।
रात 11:30 बजे सिपाही ने 25 हजार रुपये की रिश्वत तीसरे व्यक्ति के सहारे ऑनलाइन लेने के बाद छोड़ा। पीड़ित ने गुरुवार को मामले की शिकायत डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास से की। जांच में पाया गया कि बिना किसी सिपाही के युवक को हिरासत में लिया गया था।
इस पर उन्होंने आरोपित सिपाही सनी को लाइन हाजिर कर दिया है। डीसीपी सिटी ने बताया कि पीड़ित ने सिपाही पर ही आरोप लगाया था। सिपाही को तत्काल प्रभाव से लाइन भेजा गया है। मामले की प्रारंभिक जांच शुरू करा दी गई है।
जांच में अगर कोई पुलिसकर्मी और दोषी पाया जाता है तो सिपाही सहित उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बिना इंस्पेक्टर की सहमति के कैसे रखा गया अवैध हिरासत में
जेसीबी संचालक को अवैध हिरासत में रखकर वसूली करने के मामले में शाहगंज थाना पुलिस कठघरे में है। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने इस मामले में सिपाही पर कार्रवाई कर दी। मगर, इंस्पेक्टर या बीट दारोगा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रश्न यह उठ रहा है कि थाने की हवालात में किसी व्यक्ति को 12 घंटे तक रखे जाने की जानकारी इंस्पेक्टर को कैसे नहीं हुई? क्या सिपाही बिना इंस्पेक्टर की सहमति के जेसीबी संचालक को उठाकर लाया था। |
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