जीविका दीदियों को दी गई 15000 करोड़ की आर्थिक सहायता
राज्य ब्यूरो, पटना। राजद के विधान पार्षद सुनिल कुमार सिंह लगातार टोकाटाकी कर रहे थे। बुधवार को विधान परिषद में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार को उनकी यह आदत बुरी तरह अखर गई। उन्होंने क्षोभ के साथ सुनिल को झिड़की लगाई। विधानसभा में 25 सीटों पर सिमट जाने का हवाला देते हुए मर्यादा में रहने की सीख दी और उच्च सदन में उत्कृष्ट चर्चा की अपेक्षा जताई।
विभागीय बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास के संदर्भ में सरकार के कार्यों को उत्कृष्ट बताया। जीविका का उन्होंने विशेषकर उल्लेख किया। इस दावे के साथ कि नीतीश कुमार की सरकार ने जीविका के जरिये गरीबों को सूदखोरों से छुटकारा दिलाया। जो गरीब परिवार पहले पांच से दस प्रतिशत ब्याज पर सूदखोरों से ऋण लेते थे, वे अब स्वावलंबी हो चुके हैं।
इसमें सरकार द्वारा जीविका दीदियों को दिए गए 15000 करोड़ रुपये के अनुदान का बड़ा योगदान है। रोजी-रोजगार के लिए उन्हें 62628 करोड़ रुपये का ऋण दिलाया गया। बैंक सखी के रूप में प्रशिक्षित कर 6459 ग्राहक सेवा केंद्र खोले गए। अब तक 91.11 लाख जीविका दीदियों का बीमा कराया जा चुका है। 1.40 करोड़ से भी अधिक परिवार जीविका से जुड़ चुके हैं।
स्वयं सहायता समूहों की संख्या 11.45 लाख से भी अधिक हो गई है और अब यह योजना गांव से शहर की ओर बढ़ चुकी है। अब तक 4.50 शहरी परिवारों को इससे जोड़ा जा चुका है। श्रवण के तर्काें से सहमति जताते हुए सदन ने ग्रामीण विकास विभाग के 237 अरब एक करोड़ 17 लाख 90 हजार रुपये के बजट को ध्वनिमत से पारित कर दिया। उससे कुछ ही क्षण पहले विपक्ष के सदस्य सदन छोड़कर चले गए थे।
चर्चा में सहभागी: अब्दुल बारी सिद्दीकी, आफाक अहमद, विनोद कुमार जायसवाल, रीना सिंह, शशि यादव, सर्वेश कुमार, लालमोहन गुप्ता, सुनील कुमार सिंह |