संवाद सूत्र, लखनऊ। संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में असफलता मिलने पर रायबरेली निवासी 17 वर्षीय छात्र ने फंदे से लटककर जान दे दी। वह बाजारखाला इलाके में दो वर्षों से किराये पर रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा था। सोमवार शाम परीक्षा का परिणाम आया था। पास नहीं होने पर उसने अपने किराये के मकान में आत्महत्या कर ली। सोमवार को परिवारजन बिना कोई आरोप लगाए पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर गृह जनपद चले गए।
बाजारखाला इंस्पेक्टर ब्रजेश सिंह ने बताया कि रायबरेली के ग़ुरबख्शगंज स्थित कृष्ण पुर ताला गांव निवासी स्टेशनरी व्यवसायी आशुतोष शुक्ला का बेटा उज्जवल बीते दो वर्षों से चित्ता खेड़ा में विपिन साहू के मकान में किराये पर रहकर जेईई परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
सोमवार की देर शाम परिणाम घोषित हुआ तो उसने देखा लेकिन वह पास नहीं हुआ। इसके बाद से वह काफी परेशान हो गया। शाम लगभग 8:30 बजे वह अपने कमरे में चला गया और मफलर से पंखे में फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर तक वह बाहर नहीं निकला तो मकान मालिक उज्जवल को बुलाने के लिए गया।
काफी आवाज देने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। इस पर मकान मालिक ने सूचना उज्जवल के परिवारजन और पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा। सोमवार की सुबह पोस्टमार्टंम के बाद परिवारजन शव लेकर गृह जनपद चले गए। इंस्पेक्टर के मुताबिक, परिवार ने कोई आरोप नहीं लगाए हैं। अगर तहरीर मिलती है तो जांच की जाएगी।
परिवार के नहीं थम रहे आंसू
घटना के बाद पोस्टमार्टम गृह पहुंचे परिवारजन के आंसू नहीं थम रहे हैं। पिता आशुतोष हर बार बस यही कहते रहे कि बेटे पर कभी किसी चीज का दबाव नहीं बनाया फिर भी उसने ऐसा कदम उठाया। यह झटका जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।
अकेलापन और दबाव बन रहा चिंताजनक
लखनऊ विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष और मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर अर्चना शुक्ला कहती हैं कि अक्सर मां बाप की उम्मीदों की वजह से बच्चे भावनात्मक रूप से दबाव में आ जाते हैं। मां-बाप को बच्चे की क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर अभिभावकों की भी काउंसिलिंग होनी चाहिए। साथ ही बच्चों की इच्छाओं का मूल्यांकन भी किया जाए। कई बार अकेलापन भी ऐसे घटनाओं का कारण बनता है। |
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