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ग्वालतोड़ में हाथियों का तांडव; सिंचाई पंप तोड़े, फसलों को रौंद डाला, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट

LHC0088 2026-2-17 17:56:36 views 895
  

ग्वावालतोड़-रामगढ़ जंगल क्षेत्र में सड़क पर विचरण करता हाथी।


जागरण संसू, खड़गपुर। पश्चिम बंगाल के जंगल क्षेत्रों में हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला ग्वालतोड़-रामगढ़ जंगल क्षेत्र का है, जहां देर रात झुंड से अलग हुए दो हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया।    हाथियों ने सिंचाई के लिए खेतों में लगाए गए दो कीमती सब-मर्सिबल पंपों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

बांकुड़ा से पहुंचा 25 हाथियों का बड़ा झुंड
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, केवल दो हाथी ही नहीं, बल्कि गड़बेता क्षेत्र से लगभग 24-25 हाथियों का एक विशाल झुंड भी ग्वालतोड़ इलाके में प्रवेश कर चुका है। यह झुंड रविवार सुबह बांकुड़ा जिले से निकलकर गड़बेता पहुंचा था।   देर रात यह अमलागोड़ा के मागुराशोल जंगल से रेलवे लाइन पार करते हुए जामडोबा-बागडोबा के रास्ते हुमगढ़ रेंज के हदहदीर जंगल में जा पहुंचा है।    सोमवार शाम तक हाथियों की मौजूदगी भातुरबांदी जंगल क्षेत्र में दर्ज की गई है। इससे किसानों को फसल नुकसान की चिंता सता रही है।

किसानों की बढ़ी चिंता, मुआवजे की मांग
हाथियों के इस झुंड ने न केवल कृषि उपकरणों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि खेतों में खड़ी फसलों को भी पैरों तले रौंद दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के लगातार हमले से उनकी आजीविका संकट में है।    प्रभावित किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने और हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर खदेड़ने की मांग की है।

हाथियों की गितिविधयों पर वन विभाग की निगाह


फिलहाल, वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है। हाथियों के मार्ग और उनकी स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए लगातार गश्त की जा रही है। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों को शाम के समय जंगलों की ओर न जाने और सतर्क रहने की सख्त सलाह दी है।
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