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छत्रपति हत्याकांड! सीलबंद कंटेनर में रखी गोली पर हस्ताक्षर को लेकर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने कहा-कुछ स्पष्ट नहीं दिख रहा

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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में 7 वर्ष पहले सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सीलबंद कंटेनर में रखी गोली पर हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठे हैं। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह की सजा के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को मामले से संबंधित गोलियों की अदालत में भौतिक रूप से जांच की। कोर्ट ने कहा कि गोलियों पर कुछ स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहा है।

लगभग सात वर्ष पहले इस मामले में डेरा प्रमुख को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के आरंभ में केस प्रॉपर्टी के रूप में पेश की गई ‘लापुआ’ सॉफ्ट-लीड गोली का निरीक्षण किया।

अदालत ने यह देखने का प्रयास किया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ के कथित हस्ताक्षर या निशान उस गोली पर मौजूद हो सकते थे या नहीं। जबकि जिस प्लास्टिक कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की सील सुरक्षित और अक्षुण्ण बताई जा रही है।

अपील की सुनवाई में बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यही रहा कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से निकाली गई गोली को बरामदगी के समय से लेकर ट्रायल कोर्ट में खोले जाने तक सीलबंद रखा गया था। यदि दोनों सीलें सही-सलामत थीं, तो फॉरेंसिक प्रयोगशाला के विशेषज्ञ द्वारा गोली की जांच और उस पर हस्ताक्षर किए जाने का दावा कैसे संभव हुआ।

बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि कंटेनर पर एम्स की दोनों सीलें सही अवस्था में थीं और ऐसे में कंटेनर खोले बिना अंदर रखी वस्तु तक किसी की पहुंच संभव नहीं थी।

दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ की गवाही ट्रायल कोर्ट में पूरी तरह स्पष्ट है और विशेषज्ञ ने स्वयं कंटेनर खोलकर जांच करने तथा आवश्यक हस्ताक्षर होने की बात कही थी। अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि ट्रायल के दौरान कंटेनर तक कथित पहुंच या पूर्व जांच को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी।
समय के साथ स्पष्ट निशान बने रहना आवश्यक नहीं

सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने बताया कि यह गोली आयातित ‘लापुआ’ श्रेणी की सॉफ्ट-लीड गोली है, जिस पर समय के साथ स्पष्ट निशान बने रहना आवश्यक नहीं होता। इस पर खंडपीठ ने अवलोकन किया कि प्रस्तुत गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहा और यह स्पष्ट किया जाए कि हस्ताक्षर गोली पर हैं या कंटेनर पर।

अदालत को बताया गया कि कंटेनर पर हस्ताक्षर मौजूद हैं, जबकि गोली पर हस्ताक्षर की स्थिति के बारे में केवल फॉरेंसिक विशेषज्ञ ही निश्चित रूप से बता सकते हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने बहस के लिए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
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