राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य कर्मियों के स्वास्थ्य बीमा के लिए एसबीआइ जेनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड तथा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड सहित कुल सात कंपनियों ने टेंडर भरा है। अन्य कंपनियों में आइसीआइसीआइ लोंबार्ड, टाटा एआइजी जनरल इंश्योरेंस, बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एचडीएफसी ईगो जनरल इंश्योरेंस तथा इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड सम्मिलित हैं।
टेंडर भरने के लिए 16 फरवरी अंतिम तिथि निर्धारित थी। इसके अगले दिन मंगलवार को टेक्निकल बिड खुला। इससे पहले प्री बिड मीटिंग हुई थी, जिसमें कंपनियों के समस्याओं का समाधान किया गया था।
राज्य कर्मियों के स्वास्थ्य बीमा के लिए सरकारी एवं निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों की भागीदारी से इस टेंडर में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिससे राज्य कर्मियों को बेहतर कवरेज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है। बताते चलें कि इस योजना में कई बदलाव किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों को भुगतान सीजीएचएस दरों पर किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और मानकीकरण सुनिश्चित की जा सके।
साथ ही योजना के अंतर्गत देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों में वास्तविक प्राप्त या सीजीएचएस दर के आधार पर इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी, जिनमें सीएमसी, वेल्लोर, एआइजी, हैदराबाद, टाटा ग्रुप के सभी अस्पताल, आइएलबीएस, नई दिल्ली, राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, दिल्ली, नारायणा इंस्टीट्यूट आफ कार्डियक साइंसेज़, बेंगलुरु, अपोलो हास्पिटल्स, चेन्नई, मेदांता द मेडिसिटी, गुरुग्राम, इंडियन स्पाइनल इंजरीज़ सेंटर, नई दिल्ली, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली, शंकर नेत्रालय, चेन्नई और कोलकाता, नारायणा हेल्थ, बेंगलुरु, बीएम बिड़ला हार्ट रिसर्च सेंटर, कोलकाता सम्मिलित हैं। वर्तमान में स्वास्थ्य बीमा टाटा एआइजी द्वारा किया जा रहा था, जिसका कार्यकाल इसी माह खत्म हो रहा है।
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 21 मरीजों को मिलेगी आर्थिक सहायता
झारखंड राज्य आरोग्य समिति की बैठक मंगलवार को झारखंड स्टेट आरोग्य समिति के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में 21 मरीजों को मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत वित्तीय सहायता देने पर सहमति प्रदान की गई।
इसके तहत कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट और अन्य गंभीर रोगों के इलाज के लिए पांच लाख से 20 लाख तक रूपये के अनुदान प्रस्तावों की समीक्षा की गई। वहीं, पाकुड़ की एक मरीज के इलाज में 10 लाख रुपये से अधिक के मामले को भौतिक सत्यापन के बाद कैबिनेट प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया। गिरिडीह के दो अन्य मरीजों के मामले में वर्तमान चिकित्सीय स्थिति के भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए गए।
कार्यकारी निदेशक ने निर्देश दिया कि भविष्य में जिलों से प्राप्त आवेदनों में मरीज की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। यदि मरीज उपस्थित होने में असमर्थ है, तो वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनका सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। |