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ओडिशा के केंद्रपाड़ा में 3 महीने बाद सुलझा आंगनबाड़ी का जातिगत विवाद, बच्चों की वापसी से लौटी रौनक

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जातिगत विवाद सुलझने के बाद आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे बच्चे। (जागरण)



जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिला अंतर्गत गलीमाला ग्राम पंचायत के नुगांव स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र में तीन महीने से चल रहा जातिगत विवाद सोमवार को समाप्त हो गया।

उच्च जाति के परिवारों के बच्चों ने केंद्र में लौटकर दलित सहायिका द्वारा पकाए गए भोजन का सेवन किया, जिससे लंबे समय से बंद पड़ा केंद्र फिर से गुलजार हो उठा।

जानकारी के अनुसार, केंद्र में नामांकित 20 बच्चों में से 16 बच्चे अपने माता-पिता के साथ आंगनबाड़ी पहुंचे। सहायिका शर्मिष्ठा सेठी ने बच्चों को रागी के लड्डू खिलाए, इसके बाद चावल और दालमा (सब्जी की करी) बनाकर परोसी।

अनुपस्थित चार बच्चों के परिजनों ने उनके बीमार होने की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 21 नवंबर को दलित महिला शर्मिष्ठा सेठी की सहायिका के रूप में नियुक्ति के बाद कुछ उच्च जाति के परिवारों ने विरोध जताते हुए अपने बच्चों को केंद्र भेजना बंद कर दिया था।

इतना ही नहीं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले पोषाहार को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया था।
तीन महीनों तक बिना बच्चों के चला केंद्र

विवाद के चलते केंद्र लगभग तीन महीने तक बच्चों के बिना ही संचालित होता रहा। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया और संसद में भी उठा। कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यस्थल पर जातिगत भेदभाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

सोमवार को केंद्रापाड़ा की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) दीपाली मिश्रा तथा राजनगर के विधायक ध्रुबा चरण साहू बच्चों के स्वागत के लिए आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे।

  

बच्चों ने खाया खाना। (जागरण)

सेठी ने कहा कि बच्चों को खाना खाते और खिलौनों से खेलते देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। तीन महीने से सूना पड़ा केंद्र फिर से जीवंत हो गया है। मुझे उम्मीद है कि गांव में जातिगत भेदभाव दोबारा सिर नहीं उठाएगा।

सीडीपीओ मिश्रा ने बताया कि अभिभावकों के साथ आए बच्चों ने केंद्र में आनंदमय समय बिताया। उन्होंने कहा कि सहायिका की नियुक्ति को लेकर असहमति के कारण केंद्र बच्चों के बिना संचालित हो रहा था, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि मंगलवार को अनुपस्थित बच्चे भी केंद्र आएंगे, क्योंकि ग्रामीणों ने मतभेद भुलाने का निर्णय लिया है।विधायक ध्रुबा चरण साहू ने कहा कि यह मुद्दा अब अतीत की बात हो चुकी है और गांव में सौहार्द बना रहेगा।
सांसद ने आंगनबाड़ी केंद्र का कया निरीक्षण

इस बीच, केंद्रपाड़ा के सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पंडा ने बताया कि उन्होंने नुगांव आंगनबाड़ी का निरीक्षण किया और बच्चों को पौष्टिक भोजन करते देख प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों के साथ दोपहर का भोजन भी किया। पंडा, जो ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, रविवार को आयोजित एक भोज में भी शामिल हुए थे, जहां सहायिका सेठी ने अतिथियों को भोजन परोसा।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य सुजाता नायक ने बच्चों की वापसी का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाएगा।

वहीं, केंद्रापाड़ा के सब-कलेक्टर अरुण नायक ने पूर्व में बताया था कि आयोगों के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की उपस्थिति में ग्रामीणों को जागरूक कर विवाद का समाधान कराया गया। तीन महीने तक सामाजिक विभाजन का दंश झेलने के बाद अब आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की किलकारियां गूंजने लगी हैं, जो सामाजिक समरसता की नई शुरुआत का संकेत है।

यह भी पढ़ें- ओडिशा आंगनबाड़ी विवाद: दलित महिला कुक बनी तो बच्चे नहीं भेजे, खरगे ने राज्यसभा में उठाया जातिगत भेदभाव का मुद्दा
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