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Bihar Bhumi: निबंधन से पहले खरीदार को घर बैठे मिलेगी जमीन की पूरी जानकारी, सीओ होंगे जिम्मेदार

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Online Land Information: अंचलाधिकारी (सीओ) और राजस्व पदाधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वे भूमि की स्थिति स्पष्ट करें। फाइल फोटो  



प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर। Land Registration Bihar: अब बिहार में जमीन खरीदने से पहले खरीदार को संबंधित भूमि की अद्यतन जानकारी घर बैठे उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए निबंधन से पूर्व खरीदार को ई-निबंधन पोर्टल पर जमीन से जुड़ी जानकारी अपलोड करनी होगी। इसके बाद संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ) और राजस्व पदाधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि की स्थिति स्पष्ट करें।

यह नई व्यवस्था राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की संयुक्त पहल पर लागू की जा रही है। दोनों विभागों ने इस संबंध में सभी जिलों के समाहर्ताओं को पत्र जारी कर वित्तीय वर्ष 2026-27 से व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है।
पारदर्शी होगी व्यवस्था

विभागों का मानना है कि अधूरी जानकारी के कारण कई बार विवादित भूमि का निबंधन हो जाता है, जिससे बाद में कानूनी और प्रशासनिक विवाद खड़े होते हैं। इसी को रोकने के लिए निबंधन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है। इस पहल से जमीन खरीदने से पहले ही उसकी वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
क्या करना होगा आवेदक को

आवेदक को ई-निबंधन पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाकर लॉग-इन करना होगा। इसके बाद खरीद-बिक्री वाली जमीन से संबंधित पूरी जानकारी अपलोड करनी होगी, जिसमें निबंधन कार्यालय, अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता-खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी संख्या, जमाबंदी धारक, क्रेता-विक्रेता का नाम और भूमि का प्रकार शामिल है।

जानकारी भरने के बाद एक विकल्प मिलेगा, जिसमें पूछा जाएगा कि क्या आवेदक भूमि के संबंध में अद्यतन जानकारी चाहता है। इस विकल्प को चुनते ही संबंधित विवरण अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी के लॉग-इन में चला जाएगा। साथ ही आवेदक और अधिकारियों को एसएमएस के माध्यम से सूचना भी मिलेगी।
दस दिनों में मिलेगी जानकारी

अंचल कार्यालय के अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे दस दिनों के भीतर जमीन की अद्यतन स्थिति आवेदक को उपलब्ध कराएं। यह जानकारी आवेदक के लॉग-इन अकाउंट पर दिखेगी। यदि तय समय सीमा में कोई आपत्ति या अपडेट नहीं दिया जाता है, तो यह माना जाएगा कि अपलोड की गई जानकारी सही है और उसी आधार पर निबंधन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

हालांकि, निबंधन कार्यालय के सॉफ्टवेयर में रोक सूची के तहत पहले की तरह ही जांच होती रहेगी। इसमें कोर्ट से संबंधित रोक, सीलिंग भूमि, सरकारी भूमि, भू-अर्जन से जुड़े खेसरा आदि का मिलान अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

इस नई व्यवस्था से जमीन निबंधन की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और विवादमुक्त होने की उम्मीद है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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