search

हिमाचल के नाहन में धगाना गांव में शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ संपन्न, 12 ज्योतिर्लिंगों की कथा से निहाल हुए श्रद्धालु

cy520520 1 hour(s) ago views 862
  

धगाना गांव में दस दिवसीय श्री शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ 12 ज्योतिर्लिंग कथा श्रवण से हुआ सम्पन्न (फोटो: जागरण)



जागरण संवाददाता, नाहन। नाहन उपमंडल के धगाना गांव में 7 फरवरी से शुरू हुआ श्री शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ सोमवार को दसवें दिन 12 ज्योतिर्लिंगों की कथा के साथ संपन्न हुआ। व्यास पीठ से आचार्य पंडित मनीराम शर्मा ने भक्तों को कथा का श्रवण करवाया। धगाना गांव में श्री शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन जगत राम ठाकुर, उनकी पत्नी बेलमंती देवी, पुत्र रणवीर ठाकुर तथा मोनी ठाकुर द्वारा क्षेत्र की खुशहाली व समृद्धि के लिए करवाया गया।

सोमवार सुबह हवन पूर्ण आहुति, दोपहर एक बजे कथा तथा दोपहर से शाम तक चले विशाल भंडारे के साथ 10 दिवसीय कथा का समापन हुआ। सोमवार को व्यास पीठ से आचार्य पंडित मनीराम शर्मा ने भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का श्रवण सैकड़ो भक्तों को करवाया। देश में 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के अनंत प्रकाश स्तंभ के प्रतीक हैं, जो भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे।

ये ज्योतिर्लिंग सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, बैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, और घृष्णेश्वर भारत के विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं। यहां से भगवान शिवजी की अद्भुत कथाएँ जुड़ी हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले स्थान सोमनाथ (गुजरात) का हैं। चंद्रमा ने प्रजापति दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए सोमनाथ में तपस्या की थी।

शिवजी ने प्रसन्न होकर उन्हें श्राप मुक्त किया और लिंग रूप में स्थापित हुए। मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) में कार्तिकेय के वियोग में शिव-पार्वती श्रीशैल पर्वत पर आए थे, जहाँ वे मल्लिकार्जुन रूप में प्रतिष्ठित हैं। महाकालेश्वर (उज्जैन) उज्जैन में दूषण नामक राक्षस के विनाश के लिए शिवजी महाकाल रूप में प्रकट हुए और ऋषियों की प्रार्थना पर वहीं वास किया। ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) विंध्य पर्वत की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ओंकार (ॐ के आकार) के रूप में लिंग रूप में प्रकट हुए।

केदारनाथ (उत्तराखंड) पांडवों को महाभारत के पापों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव बैल (वृषभ) के रूप में प्रकट हुए और यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हुए। भीमाशंकर (महाराष्ट्र) कुंभकर्ण के पुत्र भीम राक्षस का वध कर शिवजी ने लिंग रूप धारण किया।

काशी विश्वनाथ (वाराणसी) भगवान शिव ने स्वयं काशी नगर में ज्योतिर्लिंग रूप में वास किया, जिसे मोक्षदायिनी माना जाता है। त्र्यंबकेश्वर (नासिक) गौतम ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी प्रकट हुए और गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर प्रतिष्ठित हुए। बैद्यनाथ ( झारखंड) रावण द्वारा कैलाश से ले जाए जाते समय शिवलिंग यहाँ स्थापित हो गया।

शिवजी ने रावण को आरोग्य प्रदान किया। नागेश्वर (द्वारका) भक्त सुप्रिया की रक्षा के लिए भगवान शिव ने राक्षसी दारुका का अंत किया और नागेश्वर रूप में स्थापित हुए। रामेश्वरम (तमिलनाडु) श्रीराम ने लंका पर विजय पाने से पहले यहाँ रेत का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी। घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) शिवभक्त सुधर्मा की ईर्ष्यालु पत्नी द्वारा बेटे को मारने के बाद, शिवजी ने प्रकट होकर मृत बालक को जीवित किया और ज्योतिर्लिंग के रूप में वहां वास किया।

इस प्रकार 12 ज्योतिर्लिंगों की कथा से 10 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का मंत्रों उच्चारण के साथ समापन हुआ। 10 दिन में हजारों भक्तों ने कथा का श्रवण कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
158505