अमृत विल्सन ओसीआई कार्ड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ब्रिटेन स्थित शिक्षाविद अमृत विल्सन के ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को टिप्पणी कि अदालत देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकता।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने उक्त टिप्पणी ने अमृत विल्सन की याचिका पर केंद्र सरकार द्वारा दाखिल की गई एक सीलबंद कवर रिपोर्ट को देखने के बाद की। रिपोर्ट में अमृत विल्सन के ओसीआई कार्ड को रद करने के कारणों का विवरण दिया गया था।
अमृत विल्सन ने भारत विरोधी गतिविधियों में लिया था भाग
अदालत ने कहा कि खुफिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अमृत विल्सन ने भारत विरोधी गतिविधियों में भाग लिया था। उक्त तथ्यों को देखते हुए पीठ ने कहा कि हमें इतना सहिष्णु देश नहीं होना चाहिए कि हम अपने ही देश की आलोचना की अनुमति दें, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को बदनाम किया जाए। अदालत ने कहा कि अमृत विल्सन के खिलाफ कुछ सोशल मीडिया पोस्ट न होकर कुछ खुफिया रिपाेर्ट है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भारत विरोधी गतिविधियों में भाग लिया था।
82 वर्षीय अमृत विल्सन 2023 में सरकार द्वारा उनका ओसीआई कार्ड रद करने के खिलाफ याचिका दायर की है। उन्होंने उक्त आदेश को गैरकानूनी, मनमाना और बिना सोचे-समझे लिया गया निर्णय बताया है। कोर्ट ने मई 2023 में इस याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया था।
सोमवार को सुनवाई के दौरान अमृत विल्सन की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने तर्क दिया कि ओसीआई कार्ड रद करने के लिए उन्हें जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, उसमें कोई विस्तृत जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकार ने उनके एक एक्स पोस्ट और किसानों के विरोध और कश्मीर पर लिखे लेख का जिक्र किया है।
वहीं, याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार के अधिवक्ता निधि रमन ने कहा कि पब्लिक डोमन में मौजूद सामग्री विल्सन को दे दी गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसी से कुछ इनपुट मिले हैं, जिसकी जानकारी सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपा गया है। |